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तमिल भाषा विवाद: एम.के. स्टालिन ने हिंदी थोपने के खिलाफ उठाई आवाज.
चेन्नई: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 1967 के तमिल भाषा आंदोलन की याद दिलाते हुए हिंदी थोपने के प्रयासों का विरोध किया।
मुख्य बिंदु:
- स्टालिन ने पूर्व मुख्यमंत्री अन्नादुरई की तस्वीर साझा की।
- 1967 के विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख कर तमिलों को जागरूक रहने को कहा।
- स्टालिन ने हिंदी थोपने के प्रयासों की कड़ी आलोचना की।
- उन्होंने कहा कि तमिल भाषा का सम्मान बनाए रखना जरूरी है।
- DMK पर लगाए गए आरोपों का जवाब दिया।
- कुछ लोग तमिल समर्थकों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ बता रहे हैं।
- नथूराम गोडसे की विचारधारा के समर्थकों पर निशाना साधा।
- तमिलनाडु ने भारत की कई युद्धों में योगदान दिया है।
- बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और कारगिल युद्ध में तमिलों की भूमिका याद दिलाई।
- स्टालिन ने तीन नए आपराधिक कानूनों के हिंदी नामकरण पर नाराजगी जताई।
- उन्होंने इसे तमिलों की अनदेखी करार दिया।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का विरोध दोहराया।
- तमिलनाडु को उसके योगदान के बावजूद पीछे रखा जा रहा है।
- केंद्र पर हिंदी भाषा को थोपने का आरोप लगाया।
- स्टालिन ने भाषाई समानता की मांग को दोहराया।
- उन्होंने हिंदी समर्थकों को ‘सच्चे अलगाववादी’ बताया।
- तमिलों की अस्मिता को ठेस नहीं पहुंचने दी जाएगी।
- उन्होंने कहा कि हिंदी थोपना राष्ट्रीय एकता के लिए खतरा है।
- तीन-भाषा नीति और परिसीमन जैसे मुद्दों पर खुलकर बोले।
- तमिलनाडु में इस मुद्दे पर सियासी हलचल तेज हो गई है।


