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हाईकोर्ट ने डीजीपी को जारी किया अवमानना नोटिस.

सुनवाई में पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने पर मांगा जवाब.

झारखंड हाईकोर्ट ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं होने पर राज्य के डीजीपी को अवमानना नोटिस जारी किया है। अदालत ने डीजीपी से पूछा है कि आदेश का पालन नहीं होने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों नहीं की जाए। कोर्ट ने डीजीपी को इस मामले में शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने के आदेश के अनुपालन पर सवाल उठाया। कोर्ट ने पूछा कि राज्य के पुलिस थानों में अभी तक सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगाए जा रहे हैं। अदालत ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर सभी संबंधित पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश दिया था। साथ ही मुख्य सचिव और गृह सचिव को सीसीटीवी लगाने से जुड़ी अनुपालन रिपोर्ट 30 सितंबर तक पेश करने को कहा गया है। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को अपने आदेश को गंभीरता से लेने की हिदायत दी है। अदालत ने डीजीपी को भी आदेश के अनुपालन में गंभीरता बरतने का निर्देश दिया है।

हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने गुरुवार को मामले की सुनवाई की। यह मामला झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के पूर्व प्रत्याशी तरुण महतो की पुलिस हिरासत में पिटाई से जुड़ा है। इस मामले में हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरायकेला एसपी से उनके जिले के पुलिस थानों में सीसीटीवी लगाने को लेकर हुई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी। अदालत ने प्रधान सचिव, स्वास्थ्य विभाग से भी मेडिकल ऑफिसर के संबंध में जवाब मांगा था। संबंधित मेडिकल ऑफिसर ने तरुण महतो को कोर्ट में पेश किए जाने के समय फिट फॉर कस्टडी का प्रमाणपत्र दिया था। कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि उक्त मेडिकल ऑफिसर के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। हालांकि, इस कार्रवाई के संबंध में सरकार की ओर से अब तक जवाब दाखिल नहीं किया गया है। अदालत ने मामले से जुड़े सभी अधिकारियों को कोर्ट के निर्देशों का गंभीरता से पालन करने को कहा है।

तरुण महतो वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के इचागढ़ विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी रह चुके हैं। 19 नवंबर 2025 की रात इचागढ़ पुलिस उन्हें पकड़कर थाने ले गई थी। आरोप है कि पुलिस हिरासत में उनके साथ मारपीट की गई थी। उनके साथ थर्ड डिग्री टॉर्चर किए जाने का भी आरोप लगाया गया था। घटना के बाद उनकी पत्नी ने हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी थी। पत्र के आधार पर हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद अदालत ने मामले की जांच और कार्रवाई को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा। पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने सरायकेला एसपी को संबंधित दस्तावेजों के साथ अदालत में उपस्थित होने का निर्देश भी दिया था। अब अदालत ने डीजीपी से भी आदेश के अनुपालन को लेकर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

 

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