झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और CGL-2024 से नियुक्त कर्मचारियों को लेकर सचिवालय में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कोर्ट ने प्रभावित कर्मचारियों को अगले आदेश तक काम करने देने का निर्देश दिया है। इसके बाद कुछ विभागों में कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। वहीं कुछ विभाग अभी कार्मिक विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच कार्मिक सचिव के छुट्टी पर चले जाने से स्थिति और उलझ गयी है। राज्य सरकार ने नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच 18 अगस्त को नियुक्ति से जुड़े 22 विज्ञापन रद्द कर दिये थे। इनमें JPSC की संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और JSSC की CGL-2024 परीक्षा भी शामिल थी। CGL-2024 के माध्यम से करीब 2394 कर्मचारियों की नियुक्ति हुई थी। विज्ञापन रद्द होने के बाद इन कर्मचारियों के भविष्य को लेकर सवाल खड़े हो गये थे। बाद में मामला हाईकोर्ट पहुंचा और कोर्ट के आदेश के बाद स्थिति में बदलाव आया।
सरकार के विज्ञापन रद्द करने के आदेश को स्टेट फूड सेफ्टी ऑफिसर, संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा और CDO से जुड़े मामलों में हाईकोर्ट में चुनौती दी गयी थी। CGL-2024 को रद्द करने के सरकार के फैसले को भी न्यायालय में चुनौती दी गयी थी। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार की ओर से जारी संबंधित आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने महाधिवक्ता को निर्देश दिया कि याचिका दायर करने वाले कर्मचारियों के अलावा अन्य प्रभावित कर्मचारियों को भी अगले आदेश तक काम करने दिया जाए। अदालत के इस निर्देश के बाद कुछ सरकारी विभागों ने कर्मचारियों को काम पर लेना शुरू कर दिया है। वहीं कुछ विभागों में अभी भी कर्मचारियों को काम नहीं दिया जा रहा है। खाद्य आपूर्ति विभाग समेत कुछ अन्य विभागों में ऐसी स्थिति होने की जानकारी सामने आयी है। विभागीय स्तर पर अधिकारियों के बीच भी इस आदेश को लागू करने को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। कुछ विभागीय सचिवों का कहना है कि कार्मिक विभाग की ओर से अभी तक इस संबंध में अलग से आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी वजह से कर्मचारी अलग-अलग विभागों में अलग स्थिति का सामना कर रहे हैं।
कर्मचारियों के अनुसार विज्ञापन रद्द होने के आदेश के बाद उन्होंने दो-तीन दिनों तक न तो काम किया और न ही हाजिरी बनायी। उस समय कर्मचारियों के बीच नौकरी और नियुक्ति की स्थिति को लेकर असमंजस बना हुआ था। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें काम करने की अनुमति मिली है। हालांकि कई विभागों में कार्मिक विभाग के स्पष्ट निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। कुछ अधिकारियों ने कर्मचारियों को मौखिक रूप से सीएल का आवेदन देने का सुझाव भी दिया है। बताया जा रहा है कि इस माध्यम से पहले की स्थिति को लेकर प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। कर्मचारियों का कहना है कि अलग-अलग विभागों में अलग व्यवस्था होने से परेशानी बढ़ रही है। वे चाहते हैं कि सरकार जल्द स्पष्ट आदेश जारी करे। कार्मिक विभाग की ओर से निर्देश आने के बाद स्थिति में एकरूपता आने की उम्मीद है। फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश, विभागीय स्तर की कार्रवाई और कार्मिक सचिव के छुट्टी पर होने के कारण सचिवालय में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।



