
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हालिया कार्रवाई में कोयला कारोबार से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिलने का दावा किया गया है। सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान कुछ ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं जिनमें विभिन्न अधिकारियों को कथित तौर पर भुगतान का विवरण दर्ज है। इन दस्तावेजों में लगभग 25 अधिकारियों के पदनाम का उल्लेख किया गया है। दस्तावेजों में नाम की जगह केवल पदनाम लिखे गए हैं। इनमें पुलिस विभाग के साथ कुछ प्रशासनिक पदों का भी जिक्र बताया गया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ भुगतान हजारों रुपये और कुछ लाखों रुपये प्रति माह के रूप में दर्ज हैं। हालांकि दस्तावेजों में भुगतान का कारण स्पष्ट रूप से नहीं लिखा गया है। ईडी इन रिकॉर्ड की सत्यता और उनके उद्देश्य की जांच कर रही है। फिलहाल किसी अधिकारी की भूमिका पर आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। जांच एजेंसी पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही है।
गौरतलब है कि 28 जुलाई को ईडी ने धनबाद में डिप्टी मेयर अरुण चौहान, उनके भाई हरेंद्र चौहान तथा कई कोयला कारोबारियों और उनके सहयोगियों के ठिकानों पर छापेमारी की थी। इस कार्रवाई के दौरान बड़ी मात्रा में दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड जब्त किए गए। जांच में करीब 160 करोड़ रुपये के म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात भी सामने आई है। इसके अलावा 200 से अधिक सेल डीड भी बरामद होने का दावा किया गया है। सूत्रों के अनुसार कुछ दस्तावेजों में कथित भुगतान का अलग से हिसाब-किताब दर्ज मिला है। ईडी यह जांच कर रही है कि इन लेनदेन का अवैध कोयला कारोबार से कोई संबंध है या नहीं। एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि इन भुगतानों का उद्देश्य कथित संरक्षण प्राप्त करना था या नहीं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। सभी जब्त दस्तावेजों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
सूत्रों के अनुसार जब्त दस्तावेजों में धनबाद के अलावा अन्य जिलों से जुड़े कुछ पदनामों का भी उल्लेख किया गया है। इससे जांच का दायरा कई जिलों तक बढ़ सकता है। ईडी यह भी जांच कर रही है कि कथित अवैध कोयला कारोबार का नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ था। दस्तावेजों में छोटे और बड़े पदों के अनुसार अलग-अलग राशि दर्ज होने की बात भी सामने आई है। छोटे पदों के सामने 20 से 50 हजार रुपये तक और बड़े पदों के सामने लाखों रुपये का उल्लेख बताया जा रहा है। इसके अलावा कुछ सरकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट भी बरामद होने की जानकारी मिली है। इन रिपोर्टों में अवैध कोयला कारोबार से जुड़ी सूचनाएं और कुछ कारोबारियों के नाम दर्ज बताए गए हैं। ईडी अब सभी दस्तावेजों की सत्यता और उनकी कानूनी प्रासंगिकता की जांच कर रही है। एजेंसी की ओर से फिलहाल मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।



