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अवैध खनन मामलों में 443 एटीआर अब भी लंबित.

धनबाद में सबसे अधिक शिकायतें, साहिबगंज में कार्रवाई रिपोर्ट शून्य.

झारखंड में अवैध खनन, परिवहन और खनिज भंडारण के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। सरकार की ओर से इन गतिविधियों पर रोक लगाने के दावे भी किए जाते हैं। इसके बावजूद शिकायतों पर कार्रवाई और उसकी रिपोर्टिंग की स्थिति चिंता बढ़ा रही है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 में अवैध खनन, परिवहन और भंडारण से जुड़ी 859 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें केवल 416 मामलों की एक्शन टेकन रिपोर्ट विभाग को भेजी गई। वहीं 443 मामलों की एटीआर अब भी लंबित है। आंकड़ों से स्पष्ट है कि कई जिलों में शिकायतों की जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया धीमी है। कार्रवाई रिपोर्ट लंबित रहने से विभाग को मामलों की वास्तविक स्थिति की जानकारी समय पर नहीं मिलती। इसका असर राज्य के राजस्व पर भी पड़ सकता है। साथ ही अवैध कारोबार में शामिल लोगों का मनोबल बढ़ने की आशंका रहती है।

खनिजों की निगरानी के लिए माइनिंग इंस्पेक्टर से लेकर जिला खनन पदाधिकारी तक अधिकारियों की व्यवस्था है। असिस्टेंट माइनिंग ऑफिसर, डिप्टी डायरेक्टर माइंस और क्षेत्रीय पदाधिकारी भी इस तंत्र में शामिल हैं। संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी शिकायतों की जांच करना और दोष मिलने पर कार्रवाई करना है। कार्रवाई के बाद इसकी रिपोर्ट विभाग को भेजना भी जरूरी है। इसके बावजूद सैकड़ों मामलों की एटीआर लंबित रहने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। कोयला बहुल धनबाद में दो वर्षों में सबसे ज्यादा 120 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 2024-25 में 87 और 2025-26 में 33 मामले शामिल हैं। इन 120 मामलों में सिर्फ 26 की एटीआर विभाग को मिली। इस तरह धनबाद में 94 मामलों की कार्रवाई रिपोर्ट लंबित है। यह स्थिति जिले में शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े करती है।

पाकुड़ में दोनों वित्तीय वर्षों के दौरान 93 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 67 मामलों की एटीआर विभाग को प्राप्त हुई। गिरिडीह में 73 शिकायतों के मुकाबले केवल 29 मामलों की रिपोर्ट भेजी गई। साहिबगंज में 75 शिकायतें दर्ज होने के बावजूद एक भी मामले की एटीआर नहीं मिली। रांची में दो वर्षों में 64 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 31 मामलों की एटीआर मिली, जबकि 33 मामलों की रिपोर्ट अभी लंबित है। रामगढ़, गुमला, खूंटी और सिमडेगा ने सभी दर्ज शिकायतों की एटीआर विभाग को भेजी है। कई जिलों में खनिज परिवहन की निगरानी के लिए चेकपोस्ट संचालित किए जा रहे हैं। वहीं चतरा, जामताड़ा, गोड्डा, खूंटी और देवघर ने चेकपोस्ट के लिए राशि मांगी है। रांची, लातेहार, गिरिडीह, चाईबासा और लोहरदगा में चेकपोस्ट संचालित नहीं होने से निगरानी को लेकर सवाल कायम हैं।

 

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