गुजरात के सचिवालय और विधानसभा को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। अहमदाबाद के कुछ प्रमुख स्कूलों और गांधीनगर जिला अदालत को भी धमकी दी गई है। धमकी भरे ई-मेल के सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं। ई-मेल में दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का भी जिक्र किया गया है। सूचना मिलते ही गुजरात पुलिस ने संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी। सुरक्षा एजेंसियों ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। साइबर क्राइम ब्रांच ने ई-मेल से जुड़े तकनीकी इनपुट की जांच की। इसके साथ ही डिजिटल ट्रेल को भी खंगाला गया। जांच के दौरान मामले में झारखंड का कनेक्शन सामने आया। इसके बाद गुजरात साइबर क्राइम ब्रांच की टीम देवघर पहुंच गई।
गुजरात की साइबर टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से कार्रवाई शुरू की। टीम ने जांच के दौरान चिह्नित ठिकानों पर छापेमारी की। छापेमारी के दौरान एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया। पुलिस अब संदिग्ध से पूछताछ कर रही है। उससे धमकी भरा ई-मेल भेजने के संबंध में जानकारी ली जा रही है। जांच एजेंसियां उसकी संभावित भूमिका का पता लगाने में जुटी हैं। ई-मेल और संदिग्ध के बीच किसी तरह के संबंध की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि संदेश भेजने के लिए कौन सा डिजिटल माध्यम इस्तेमाल हुआ। जांच में सामने आए तकनीकी साक्ष्यों का भी विश्लेषण किया जा रहा है। गुजरात और झारखंड की एजेंसियां मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं।
जांच एजेंसियां धमकी के पीछे की वास्तविक मंशा का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। इसके लिए डिजिटल गतिविधियों से जुड़े इनपुट की पड़ताल की जा रही है। ई-मेल भेजने वाले व्यक्ति की पहचान से जुड़े पहलुओं की भी जांच हो रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह भी देख रही हैं कि धमकी का कोई व्यापक नेटवर्क तो नहीं है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने कई जानकारियां सार्वजनिक नहीं की हैं। हिरासत में लिए गए संदिग्ध से पूछताछ के आधार पर आगे की कार्रवाई हो सकती है। जांच पूरी होने के बाद मामले से जुड़े और तथ्य सामने आने की संभावना है। फिलहाल गुजरात साइबर क्राइम ब्रांच देवघर में जांच कर रही है। स्थानीय पुलिस भी जांच में सहयोग कर रही है। धमकी मामले को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।



