राज्य सरकार ने नियुक्तियों से जुड़े विज्ञापनों को रद्द करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में अपना शपथ पत्र दाखिल किया है। सरकार ने कहा है कि उसे नियुक्ति नीति तय करने और नियुक्ति प्रक्रिया संचालित करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है। इसी अधिकार के तहत सरकार को परिस्थितियों के अनुसार नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन रद्द करने का भी अधिकार है। जेपीएससी के उप सचिव सुधीर कुमार की ओर से अदालत में यह शपथ पत्र दाखिल किया गया है। शपथ पत्र में विज्ञापन संख्या 21/2023 को रद्द किए जाने का उल्लेख किया गया है। इस विज्ञापन के माध्यम से सीडीपीओ पदों पर नियुक्ति की गई थी। सरकार के अनुसार संबंधित विज्ञापन को अधिसूचना के माध्यम से रद्द किया गया है। इस फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में सरकार की अधिसूचना को निरस्त करने की मांग की गई है। मामले में अदालत की ओर से पहले ही स्थगनादेश जारी किया जा चुका है।
सरकार ने अपने जवाब में याचिकाकर्ता की दलील को स्वीकार करने योग्य नहीं बताया है। शपथ पत्र में कहा गया है कि विज्ञापन रद्द करने की कार्रवाई सरकार के अधिकार क्षेत्र में आती है। सरकार ने अपनी वैधानिक और प्रशासनिक शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए यह फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि विशेष परिस्थितियों में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन वापस लेने का अधिकार उसके पास है। शपथ पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संबंधित कार्रवाई कानून के तहत उपलब्ध अधिकारों के आधार पर की गई है। सरकार ने अदालत से याचिका को खारिज करने का आग्रह किया है। उसके अनुसार नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े फैसले लेने में सरकार की भूमिका वैधानिक रूप से निर्धारित है। सरकार ने विज्ञापन रद्द करने के निर्णय को प्रशासनिक अधिकार के दायरे में बताया है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए गए हैं। अब अदालत के समक्ष सरकार के जवाब और याचिकाकर्ता की दलीलों पर विचार किया जाएगा।
शपथ पत्र में विज्ञापन रद्द करने से जुड़े अन्य कारणों का भी उल्लेख किया गया है। सरकार ने कहा है कि इन कारणों पर वह अदालत में सुनवाई के दौरान विस्तार से अपना पक्ष रखेगी। सरकार के मुताबिक सभी तथ्यों को बहस के दौरान न्यायालय के सामने रखा जाएगा। इससे मामले में नियुक्ति विज्ञापन रद्द करने के पीछे की परिस्थितियां स्पष्ट होने की उम्मीद है। सीडीपीओ नियुक्ति से जुड़े इस विवाद पर अदालत का फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल अदालत के समक्ष सरकार की ओर से अपना लिखित जवाब प्रस्तुत किया जा चुका है। सरकार ने अपनी कार्रवाई को वैधानिक अधिकारों के अनुरूप बताया है। दूसरी ओर याचिकाकर्ता ने विज्ञापन रद्द करने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे। अदालत के निर्णय के बाद नियुक्ति विज्ञापन और उससे जुड़ी प्रक्रिया की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।



