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झारखंड को माइंस से माइंड्स बनाने का लक्ष्य तय.

नवाचार और निवेश से विकास की नई राह खुलेगी.

नई दिल्ली और रांची में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन के समापन सत्र में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के विकास का नया विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि राज्य की पहचान अब केवल खनिज संपदा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। झारखंड को बौद्धिक क्षमता और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में भी अग्रणी बनाना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य को रिसर्च और इनोवेशन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए नवाचार और शोध संस्थानों का स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार दीर्घकालिक विकास योजनाओं पर गंभीरता से कार्य कर रही है। नई तकनीकों के उपयोग से राज्य को सतत विकास के मार्ग पर आगे बढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम में उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों और निवेशकों ने भी भाग लिया। सभी पक्षों के साथ विकास की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। हालांकि इस संबंध में मंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

कार्यक्रम के दौरान झारखंड सरकार ने कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कुल 14 एमओयू किए गए। इनमें कई प्रमुख औद्योगिक और वैश्विक संस्थाएं शामिल रहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये समझौते केवल कागजी औपचारिकता नहीं हैं। उन्होंने इन्हें राज्य के उज्ज्वल भविष्य की उपलब्धि बताया। मुख्यमंत्री के अनुसार ये नीतियां नहीं बल्कि नई संभावनाओं के द्वार हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों से रोजगार और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे। राज्य के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई गति मिलेगी। सरकार सभी परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दे रही है। इसके लिए विभागों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शॉर्ट टर्म योजनाओं के बजाय लॉन्ग टर्म पार्टनरशिप पर जोर दे रही है। उन्होंने अधिकारियों को योजनाओं को तय समय सीमा में पूरा करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने जियाडा की रियायत योजना की समीक्षा करने की बात कही। इस रियायत को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत तक करने की संभावना पर विचार करने का निर्देश दिया गया। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि अतीत में संवाद की कमी के कारण राज्य की क्षमता पूरी दुनिया के सामने नहीं आ सकी। उन्होंने कहा कि अब निवेशकों और संस्थाओं के साथ लगातार संवाद बनाए रखा जाएगा। कार्यक्रम के अंत में मुख्यमंत्री ने सभी अतिथियों और निवेशकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने झारखंड के विकास में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए अपना संबोधन समाप्त किया।

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