पहले दिन आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल गवर्नेंस पर विस्तृत चर्चा हुई। देश और विदेश के विशेषज्ञों ने कार्यक्रम में भाग लिया। उद्योग जगत, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं की भी उपस्थिति रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड केवल खनिज संपदा का राज्य नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य की पहचान अब माइंस के साथ-साथ माइंड्स से भी बननी चाहिए। उन्होंने अनुसंधान, नवाचार और ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था पर विशेष जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का औद्योगिक विकास देश की प्रगति से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्राकृतिक संसाधनों के साथ मानव संसाधन को भी समान महत्व देने की बात कही। कार्यक्रम में माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और अन्य प्रमुख तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने राज्य में डिजिटल इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर बल दिया। आईटी निवेश बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा हुई। झारखंड एआई पॉलिसी सहित कई नीतियों के कॉन्सेप्ट पेपर हितधारकों के सामने रखे गए। निवेशकों और विशेषज्ञों से इन नीतियों पर सुझाव आमंत्रित किए गए। बिजनेस-टू-गवर्नमेंट संवाद के दौरान निवेश और साझेदारी की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि सुझावों के आधार पर निवेशक-अनुकूल नीतियां तैयार की जाएंगी। उन्होंने रोजगार सृजन और व्यापक विकास के लक्ष्य को दोहराया।
कार्यक्रम में कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने तकनीक आधारित विकास की आवश्यकता बताई। विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह भी उपस्थित रहे। आईबीएम के तल्लीन कुमार ने सूचना प्रौद्योगिकी की संभावनाओं पर प्रस्तुति दी। माइक्रोसॉफ्ट के संदीप अरोड़ा और गूगल के राजेश रंजन ने भी अपने विचार साझा किए। सचिव सूचना प्रौद्योगिकी श्रीमती पूजा सिंघल ने स्वागत संबोधन दिया। धन्यवाद ज्ञापन निदेशक सूचना प्रौद्योगिकी माधवी मिश्रा ने किया। उद्योग विभाग और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हितधारकों ने भाग लिया। हालांकि इस संबंध में मंत्री कार्यालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।



