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जेपीएससी पीटी परिणाम पर आजसू ने उठाए गंभीर सवाल और मांगें.

कटऑफ सार्वजनिक करने तथा निष्पक्ष जांच की मांग दोहराई प्रेस वार्ता में.

रांची : 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर आजसू पार्टी ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पार्टी मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पूर्व विधायक एवं केंद्रीय महासचिव लंबोदर महतो और महासचिव संजय मेहता ने अपनी बात रखी। नेताओं ने परिणाम की पारदर्शिता पर सवाल उठाया। उन्होंने आयोग से सभी श्रेणियों का कटऑफ सार्वजनिक करने की मांग की। परिणाम की वैधानिकता स्पष्ट करने की भी मांग की गई। पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग भी उठाई गई। पार्टी का कहना है कि अभ्यर्थियों के बीच कई तरह की शंकाएं बनी हुई हैं। आयोग को इन सभी सवालों का स्पष्ट जवाब देना चाहिए। आजसू ने पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने पर जोर दिया।

पार्टी नेताओं ने कहा कि जब तक आयोग सभी विवादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं करता, तब तक मुख्य परीक्षा आयोजित नहीं की जानी चाहिए। उनका आरोप है कि आयोग कटऑफ सार्वजनिक करने से बच रहा है। इससे अभ्यर्थियों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। लंबोदर महतो ने कहा कि आयोग से जुड़े कई आरोप मीडिया में सामने आए हैं। इसके बावजूद आयोग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। संजय मेहता ने परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि चयनित अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या हरियाणा और उत्तर प्रदेश के उम्मीदवारों की है। उन्होंने आयोग से इस संबंध में तथ्य स्पष्ट करने की मांग की। पार्टी ने पूरे मामले में पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

आजसू ने एसटी, एससी, ओबीसी-1, ओबीसी-2 और ईडब्ल्यूएस सहित सभी श्रेणियों का कटऑफ जारी करने की मांग की। उत्तर पुस्तिकाएं और उत्तर कुंजी सार्वजनिक करने की भी मांग की गई। पार्टी ने आयोग के सदस्यों के बीच सहमति को लेकर भी सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर वायरल ओएमआर शीटों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई। 832 अभ्यर्थियों के परिणाम सूची में क्रमबद्ध नहीं होने पर भी सवाल उठाया गया। 103 रिक्तियों के विरुद्ध 2204 अभ्यर्थियों के चयन पर भी आपत्ति जताई गई। मेन्स परीक्षा के लिए कम समय दिए जाने का मुद्दा भी उठाया गया। पार्टी ने कहा कि सभी बिंदुओं पर स्पष्टता आने तक मेन्स परीक्षा स्थगित की जानी चाहिए। सरकार पर नियुक्ति प्रक्रिया में देरी का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी भी दी गई। हालांकि इस संबंध में झारखंड लोक सेवा आयोग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

 

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