
झारखंड में बारिश की कमी का असर खेती पर साफ दिखाई देने लगा है। बोकारो समेत कई जिलों के किसान परेशान हैं। समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खेत सूखे पड़े हैं। धान की खेती प्रभावित होती नजर आ रही है। कई खेतों में बिचड़े तैयार नहीं हो सके हैं। जहां बिचड़े डाले गए थे, वहां भी वे सूख गए। किसान दोबारा बिचड़ा डालने को मजबूर हो रहे हैं। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। किसानों के सामने आर्थिक संकट गहराने लगा है। समय पर बारिश नहीं होने से खेती का भविष्य अनिश्चित दिखाई दे रहा है।
किसान पंचानन ने बताया कि पहली बार डाले गए बीज ठीक से नहीं उगे। इसी कारण उन्हें दोबारा बिचड़ा तैयार करना पड़ा। उन्होंने कहा कि धान रोपनी अब तक शुरू हो जानी चाहिए थी। बारिश नहीं होने से खेत खाली पड़े हैं। किसानों की उम्मीद केवल अच्छी बारिश पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर खेती नहीं हुई तो लागत निकालना भी मुश्किल होगा। कई किसान मजदूरी करने को मजबूर हो सकते हैं। खेती पर निर्भर परिवारों की चिंता लगातार बढ़ रही है। गांवों में भी सूखे जैसे हालात महसूस किए जा रहे हैं। किसान मौसम में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं।
जानकारों के अनुसार राज्य में खेती के लिए 15 जुलाई तक का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। बोकारो के लगभग 90 प्रतिशत किसान वर्षा आधारित खेती करते हैं। इस बार अब तक केवल 125.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। धान की अच्छी खेती के लिए 750 से 1500 मिमी वर्षा आवश्यक मानी जाती है। कृषि विशेषज्ञों ने समय पर बारिश नहीं होने पर सूखे की आशंका जताई है। उनका कहना है कि जुलाई के तीसरे सप्ताह तक अच्छी वर्षा जरूरी है। सरकार को राहत और वैकल्पिक व्यवस्था पर भी विचार करना चाहिए। किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हुई हैं। सभी अच्छी बारिश की उम्मीद कर रहे हैं। समय पर वर्षा होने से ही खेती को नई उम्मीद मिल सकेगी।



