रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर हरिश कुमार पाठक की याचिका स्वीकार कर महत्वपूर्ण आदेश दिया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को पदोन्नति देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि उन्हें वर्ष 2018 की विभागीय पदोन्नति समिति की तिथि से इंस्पेक्टर बनाया जाए। साथ ही सभी अनुषंगी सेवा लाभ भी दिए जाएं। यह फैसला सेवा संबंधी विवाद से जुड़ा है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और अधिवक्ता शिवानी भारद्वाज ने पक्ष रखा। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई। कोर्ट ने पूरे मामले का विस्तृत परीक्षण किया। इसके बाद यह आदेश पारित किया गया। निर्णय को सेवा कानून के महत्वपूर्ण मामलों में माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने पदोन्नति नहीं देने की कार्रवाई को कानून के अनुरूप नहीं माना। न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ता को 13 और 16 जुलाई 2018 की डीपीसी से पदोन्नति मिले। उनके जूनियर अधिकारियों के समान वेतन और वरिष्ठता का लाभ भी दिया जाए। अन्य सभी सेवा संबंधी लाभ भी उपलब्ध कराए जाएं। कोर्ट ने आदेश के पालन के लिए आठ सप्ताह की समय-सीमा तय की है। न्यायालय ने कहा कि यदि कर्मचारी बाद में आरोपों से मुक्त हो जाता है तो उसे मूल डीपीसी की तिथि से पदोन्नति का अधिकार मिलेगा। इसे स्थापित कानूनी सिद्धांत बताया गया। कोर्ट ने कहा कि वर्ष 2022 का आपराधिक मामला वर्ष 2018 की डीपीसी को प्रभावित नहीं करेगा। क्योंकि उस समय ऐसा कोई मामला लंबित नहीं था।
याचिकाकर्ता वर्ष 1991 से पुलिस सब-इंस्पेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। वर्ष 2018 की डीपीसी में उनका नाम शामिल था। उस समय विभागीय कार्यवाही के आधार पर पदोन्नति नहीं दी गई थी। बाद में वर्ष 2020 की डीपीसी में भी उन्हें उपयुक्त पाया गया। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति नहीं मिली। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि उनके खिलाफ छह विभागीय कार्यवाहियां चली थीं। इनमें उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया या दंड आदेश निरस्त कर दिया गया। अंतिम राहत उन्हें 10 सितंबर 2021 को मिली। इसके बाद उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब सरकार को निर्धारित समय में कार्रवाई करनी होगी।



