झारखंड में लगातार बढ़ रहे सड़क हादसों को रोकने के लिए राज्य सरकार ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। राज्य के राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर दुर्घटनाओं की स्थिति को देखते हुए 102 अति-संवेदनशील स्थानों की पहचान की गई है। इन स्थानों को ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। इन ब्लैक स्पॉट पर पहले भी कई गंभीर सड़क हादसे हो चुके हैं। सरकार अब इन खतरनाक स्थानों की कमियों को दूर करने की तैयारी कर रही है। कई प्रमुख सड़कों पर तीखे मोड़ हादसों की बड़ी वजह बन रहे हैं। कुछ जगहों पर जरूरी साइन बोर्ड नहीं होने से भी वाहन चालकों को परेशानी होती है। खराब सड़क बनावट और पर्याप्त रोशनी की कमी भी दुर्घटनाओं का कारण बन रही है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए संबंधित विभागों को मिलकर काम करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। पथ निर्माण विभाग, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस मिलकर सुरक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाएंगे।
ब्लैक स्पॉट वाले इलाकों में हाईवे पेट्रोलिंग को और मजबूत किया जाएगा। तेज रफ्तार वाहनों पर निगरानी के लिए स्पीड रडार गन का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके साथ ही आधुनिक निगरानी कैमरों की मदद से यातायात नियमों पर नजर रखी जाएगी। ओवरलोडिंग करने वाले वाहनों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। शराब पीकर वाहन चलाने वाले चालकों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। लेन का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई होगी। नियम तोड़ने वाले चालकों पर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य हादसों की संख्या को कम करना और लोगों की जान बचाना है। इसके लिए सड़क की इंजीनियरिंग से जुड़ी कमियों को प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाएगा। जरूरी स्थानों पर स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएंगे।
सड़क हादसों के बाद घायलों को जल्द इलाज दिलाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके लिए गोल्डन आवर रणनीति को प्रभावी बनाने की तैयारी है। ब्लैक स्पॉट के आसपास के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर सुविधाओं से लैस किया जाएगा। नजदीकी ट्रामा केयर यूनिट्स में आधुनिक जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध कराने की योजना है। आपातकालीन एंबुलेंस की प्रतिक्रिया समय को भी कम करने का प्रयास किया जाएगा। इससे दुर्घटना के बाद घायलों को जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा। योजना के तहत कुछ स्थानों पर सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने का काम भी किया जाएगा। पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था कर रात में दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि सड़क सुधार और जन-जागरूकता से हादसों में कमी आएगी। सरकार की कोशिश राजमार्गों को सुरक्षित, सुगम और दुर्घटना मुक्त बनाने की है।



