खरीफ कर्मशाला में कृषि मंत्री ने अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी.
किसानों के हितों में लापरवाही करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई.
रांची में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला का मंगलवार को समापन हुआ। कार्यक्रम में कृषि मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। कृषि मंत्री ने किसानों के हितों को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए लापरवाही किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। कर्मशाला में कृषि प्रभाग के कई निदेशकों की अनुपस्थिति पर मंत्री ने नाराजगी जतायी। उन्होंने कहा कि किसानों के हित में काम करने वाले अधिकारियों को सम्मान मिलेगा। वहीं लापरवाही करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि इस वर्ष कम बारिश की संभावना को देखते हुए सरकार पहले से तैयारी कर रही है। किसानों को समय पर बीज और सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना जरूरी है। उन्होंने सभी अधिकारियों को जिम्मेदारी के साथ काम करने का निर्देश दिया।
कृषि मंत्री ने सूखे की संभावित स्थिति को देखते हुए विस्तृत एक्शन प्लान जारी किया। उन्होंने कहा कि जिला कृषि पदाधिकारी नोडल अधिकारी के रूप में काम करेंगे। सभी कृषि प्रभाग के अधिकारी मिलकर किसानों के लिए कार्य करेंगे। मंत्री ने 15 मई तक जिला स्तरीय बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया। साथ ही 20 मई को हर जिले में खरीफ मेला लगाने को कहा गया। मेले में 500 प्रगतिशील किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। पंचायत स्तर तक किसानों को जागरूक करने पर जोर दिया गया। मंत्री ने कहा कि किसानों को सरल भाषा में योजनाओं की जानकारी दी जाए। सॉइल टेस्टिंग काउंटर लगाने और बीज वितरण की भी व्यवस्था करने को कहा गया। स्वयं सहायता समूह और एफपीओ के माध्यम से बीज वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों को किसानों के बीच लगातार संपर्क बनाये रखने को कहा गया।
कृषि मंत्री ने पशुपालन, मत्स्य और भूमि संरक्षण कार्यों पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि पशुओं की दवा वितरण व्यवस्था समय पर पूरी होनी चाहिए। तालाबों के जीर्णोद्धार और मत्स्य बीज वितरण को मई अंत तक पूरा करने का निर्देश दिया गया। सोलर पंप, ड्रिप इरीगेशन और मधुमक्खी पालन योजनाओं के अनुपालन पर भी जोर दिया गया। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति एससी दुबे ने जल संरक्षण और खेती में विविधता बढ़ाने की बात कही। विशेष सचिव गोपाल जी तिवारी ने कहा कि सूखे की स्थिति से निपटने के लिए राज्य स्तर पर रणनीति तैयार की जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने धान की उन्नत खेती और बेहतर बीज चयन की जानकारी दी। वैज्ञानिकों ने मिलेट्स खेती और मिट्टी संरक्षण पर भी प्रशिक्षण दिया। कार्यक्रम में सूखे से बचाव को लेकर तैयार डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। कर्मशाला में राज्यभर के कृषि पदाधिकारी और वैज्ञानिक शामिल हुए।



