रांची में झारखंड हाईकोर्ट ने हजारीबाग की एक गंभीर घटना पर स्वतः संज्ञान लिया है। मामला विष्णुगढ़ प्रखंड के कोसुंभा गांव से जुड़ा है। यहां 12 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना सामने आई थी। घटना को अदालत ने अत्यंत गंभीर बताया। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य के डीजीपी, गृह सचिव और एसपी हजारीबाग को नोटिस जारी किया। सभी अधिकारियों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया। अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए चीफ जस्टिस के पास भेज दिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी है। न्यायालय ने घटना पर चिंता व्यक्त की।
सुनवाई के दौरान घटना से जुड़े दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने दस्तावेजों का अवलोकन करते हुए मामले को गंभीर माना। न्यायालय को बताया गया कि घटना मार्च के अंत में हुई थी। प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। अदालत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति बताया। वर्चुअल माध्यम से पुलिस अधिकारी सुनवाई में शामिल हुए। खंडपीठ ने जांच की वर्तमान स्थिति के बारे में सवाल पूछे। वैज्ञानिक साक्ष्यों के संग्रह की जानकारी भी मांगी गई। अधिकारियों ने बताया कि जांच जारी है। तकनीकी आधार पर कार्रवाई करने की बात कही गई।
कोर्ट ने जांच की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त किया। कहा गया कि पर्याप्त समय बीतने के बाद भी ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। फॉरेंसिक जांच और साक्ष्य संरक्षण को लेकर सवाल उठाए गए। अदालत ने जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता की आवश्यकता बताई। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता जरूरी है। कोर्ट ने मीडिया की भूमिका का भी उल्लेख किया। कहा कि समाचार माध्यमों से ही घटना की गंभीरता सामने आई। अदालत ने अधिकारियों को जिम्मेदारी से काम करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई जल्द होने की संभावना है। पूरे राज्य में इस घटना को लेकर चिंता का माहौल बना हुआ है।


