रांची में डाक विभाग से जुड़े लंबे सेवा विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने केंद्र सरकार और डाक विभाग की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश को चुनौती देने के लिए दाखिल की गई थी। हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अधिकरण का आदेश पूरी तरह सही और कानूनी है। अदालत ने कर्मचारी राम सेवक महतो के पक्ष में दिए गए फैसले को बरकरार रखा। सुनवाई के दौरान डाक विभाग ने बताया कि वह केवल नियमितीकरण के आदेश का विरोध कर रहा है। विभाग ने कहा कि टेम्पररी स्टेटस के आदेश को चुनौती नहीं दी गई थी। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को विस्तार से सुना। इसके बाद न्यायालय ने कर्मचारी के लंबे सेवा काल को महत्वपूर्ण माना। अदालत ने कहा कि न्याय और कानून दोनों का संतुलन जरूरी है।
मामला रांची जीपीओ में कार्यरत रहे राम सेवक महतो की सेवा से जुड़ा था। उन्होंने अपनी सेवा के नियमितीकरण और टेम्पररी स्टेटस की मांग को लेकर आवेदन दिया था। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण ने 15 मार्च 2024 को उनके पक्ष में फैसला सुनाया था। आदेश में उन्हें टेम्पररी स्टेटस देने का निर्देश दिया गया था। साथ ही तीन वर्षों बाद ग्रुप डी यानी एमटीएस का दर्जा देने को कहा गया था। अधिकरण ने नियमितीकरण पर भी विचार करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश को डाक विभाग ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। विभाग का तर्क था कि नियमितीकरण नियमों के अनुसार नहीं है। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कर्मचारी की निरंतर सेवा को प्रमुख आधार माना।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कहा कि राम सेवक महतो 10 सितंबर 1993 से लगातार सेवा दे रहे थे। उन्होंने लगभग 25 वर्षों तक विभाग में कार्य किया। कोर्ट ने माना कि उन्हें स्वीकृत खाली पद पर काम कराया गया था। इसलिए उनका नियमितीकरण न्यायसंगत है। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला भी दिया। विशेष रूप से उमादेवी मामले का उल्लेख किया गया। कोर्ट ने कहा कि बैकडोर एंट्री रोकना जरूरी है लेकिन लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों के साथ न्याय भी आवश्यक है। न्यायालय ने प्रशासन को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। इस फैसले को कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। निर्णय के बाद कर्मचारी पक्ष में संतोष का माहौल देखा गया।



