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डोरंडा डाकघर नोटबंदी केस में तीनों आरोपी अदालत से बरी.

अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध नहीं कर सका, कोर्ट ने राहत दी.

रांची के डोरंडा मुख्य डाकघर से जुड़े नोटबंदी मामले में अदालत का महत्वपूर्ण फैसला आया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। यह मामला कथित रूप से लाखों रुपये के गबन से संबंधित था। तत्कालीन पोस्टमास्टर डोमिनिक जोसेफ मिंज को राहत मिली। ट्रेजरर शिव रंजन प्रसाद और डाक सहायक चेपो उरांव भी बरी हुए। मामले की सुनवाई कई वर्षों से जारी थी। अदालत ने सभी साक्ष्यों की समीक्षा की। दोनों पक्षों की दलीलें विस्तार से सुनी गईं। इसके बाद निर्णय सुनाया गया। फैसले से आरोपियों को बड़ी कानूनी राहत मिली।

कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त प्रमाण पेश नहीं कर सका। आरोपों को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य नहीं मिले। बचाव पक्ष ने रिकॉर्ड और नकदी का मिलान प्रस्तुत किया। अदालत को बताया गया कि वित्तीय रिकॉर्ड सही पाए गए। नकदी में किसी प्रकार की कमी साबित नहीं हुई। जांच में कई संदेह बने रहे। न्यायालय ने कहा कि केवल आरोप पर्याप्त नहीं होते। सजा के लिए स्पष्ट प्रमाण आवश्यक हैं। इसी आधार पर आरोपियों को बरी किया गया। अदालत ने निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया पर जोर दिया।

यह मामला वर्ष 2016 की नोटबंदी अवधि का था। आरोप था कि नई और पुरानी करेंसी के मिलान में गड़बड़ी हुई। सीबीआई ने लगभग 4.82 लाख रुपये के गबन का आरोप लगाया था। अधिकारियों पर मिलीभगत का भी आरोप था। आईपीसी की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम भी लागू किया गया था। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दायर हुई। लंबी सुनवाई के बाद फैसला आया। अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ दिया। इस फैसले के साथ मामला समाप्त हो गया।

 

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