झारखंड हाईकोर्ट में प्रशासनिक देरी से जुड़ा मामला सामने आया। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि आदेश लागू न होना चिंताजनक है। इससे शासन प्रणाली प्रभावित होती है। न्यायालय ने जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया।
सुनवाई में विभागीय सचिव ने अधिकारों की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि कुछ अधिकारियों पर कार्रवाई सीमित है। उपायुक्त राजस्व कर्मचारी के खिलाफ कदम उठा सकते हैं। अदालत ने पूछा कि आदेश के बाद कार्रवाई क्यों टली। संतोषजनक उत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया।
कोर्ट ने सरकार से भविष्य की कार्ययोजना मांगी है। प्रशासनिक सुधार पर चर्चा करने की बात कही गई। अगली सुनवाई दो अप्रैल को होगी। फिलहाल अधिकारियों को व्यक्तिगत उपस्थिति से राहत मिली। मामले की निगरानी जारी रहेगी।



