सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों में कार्यकारी डीजीपी की नियुक्ति पर रोक लगा दी है। अदालत ने इस व्यवस्था को नियमों के विरुद्ध माना। कोर्ट ने सभी राज्यों को नियमित डीजीपी नियुक्त करने का निर्देश दिया। आदेश के अनुसार एक महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यह फैसला प्रकाश सिंह बनाम केंद्र सरकार मामले की सुनवाई में आया। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने की। अदालत ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई राज्य कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं कर रहे हैं। कार्यकारी डीजीपी नियुक्त कर नियमों की अनदेखी की जा रही है। अदालत ने इसे गंभीर उल्लंघन माना। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अब प्रभारी डीजीपी नियुक्त नहीं किए जा सकेंगे। कोर्ट ने प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की बात कही।
अदालत ने राज्यों को आईपीएस अधिकारियों का पैनल तैयार करने को कहा। यह पैनल संघ लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा। यूपीएससी की सहमति के बाद नियुक्ति होगी। तीन अधिकारियों में से एक को डीजीपी बनाया जाएगा। समय पर पैनल नहीं भेजने पर कार्रवाई संभव है। यूपीएससी अवमानना की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। अदालत ने आदेश के पालन पर सख्त रुख दिखाया।



