झारखंड में आपराधिक घटनाओं के साथ-साथ सुरक्षा चूक के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बीते कुछ महीनों में अपराधियों की फरारी ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अपराधी कभी कोर्ट परिसर से तो कभी जेल और थाना से भागने में सफल रहे हैं। इन घटनाओं से आम जनता में भय का माहौल बना है। सुरक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।
पाकुड़ जिले में सात जनवरी को गंभीर चूक सामने आई थी। अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के तुरंत बाद दो दोषी अपराधी फरार हो गए। यह घटना न्यायिक परिसर की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न है। वहीं हजारीबाग केंद्रीय कारा से तीन कैदियों का भागना और भी चौंकाने वाला रहा। कैदियों ने रात के अंधेरे में योजना बनाकर फरारी को अंजाम दिया।
जमशेदपुर थाना परिसर से आरोपी का फरार होना पुलिस व्यवस्था पर सीधा सवाल है। हालांकि आरोपी को बाद में गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन इस घटना ने व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया। विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा में सुधार जरूरी है। प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग हो रही है।



