दरअसल, पुलिस ने इस व्यक्ति को पैरासिटामॉल की गोलियां रखने के आरोप में गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में यह साबित हुआ कि यह आरोप झूठा था। याचिकाकर्ता का कहना था कि उसने पुलिस अधिकारी को ओवरटेक करने से मना किया था, जिसके बाद पुलिस ने उस पर झूठा मुकदमा दर्ज कर दिया। याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि पुलिस ने उसे परेशान करने के लिए यह सब किया। अदालत ने पुलिस की इस कार्रवाई को गैरकानूनी करार देते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि पुलिस को ऐसे झूठे मुकदमे दर्ज नहीं करने चाहिए जिससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे। यह फैसला पुलिस की मनमानी के खिलाफ एक बड़ी जीत माना जा रहा है। इस फैसले से अन्य लोगों को भी न्याय मिलने की उम्मीद है जिन्हें पुलिस ने झूठे आरोपों में फंसाया है।


