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न्यायालय के आदेश बाद रिम्स परिसर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज.

सभी याचिकाएं खारिज होने से प्रशासन को स्पष्ट कानूनी समर्थन मिला.

रांची में रिम्स परिसर से संबंधित अतिक्रमण विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है. हाईकोर्ट ने मामले में दायर सभी विरोध याचिकाएं खारिज कर दी हैं. अदालत ने कहा कि सार्वजनिक संस्थान की जमीन किसी भी तरह के कब्जे की पात्र नहीं. इस फैसले से प्रशासन को कार्रवाई जारी रखने का कानूनी अधिकार पुनः मिला. परिसर में चल रहे अभियान पर कोई रोक नहीं लगाई गई. कई व्यक्तियों ने हस्तक्षेप याचिका दाखिल कर कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया था. लेकिन अदालत ने इसे अस्वीकार करते हुए कार्रवाई को सही ठहराया. यह निर्णय अस्पताल के संचालन में भी सुव्यवस्था लाएगा. रिम्स क्षेत्र में दबाव और अव्यवस्था लंबे समय से मुद्दा रहा है.

सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे. डीसी, एसएसपी और बड़गाई सीओ ने अपने दस्तावेज अदालत के सामने प्रस्तुत किए. अदालत को बताया गया कि पूर्व आदेश में अतिक्रमणकारियों को खुद हटाने का समय दिया गया था. इसके बावजूद अधिकांश लोगों ने जगह खाली नहीं की. प्रशासन ने कोर्ट को बताया कि अभियान कानून के अनुसार चलाया जा रहा है. अदालत ने कहा कि अस्पताल परिसर को मुक्त कराना प्राथमिकता है. इससे अस्पताल की सेवाओं का विस्तार सुचारू रूप से होगा. शहरवासियों ने भी इस पहल का समर्थन किया है.

हालांकि कैलाश कोठी से जुड़े मामले पर अदालत ने अलग रुख अपनाया है. इस संपत्ति को हटाने पर लगी रोक यथावत है. सोमवार को इस पर विस्तृत सुनवाई होगी. प्रशासन का कहना है कि इस एक स्थल को छोड़ बाकी हिस्सों में कार्रवाई जारी रहेगी. परिसर के आस-पास के लोग राहत की उम्मीद कर रहे हैं. अतिक्रमण हटने से यातायात और आवागमन भी सुधरेगा. रिम्स के कर्मचारियों ने भी फैसले को सकारात्मक बताया. आने वाले दिनों में परिसर का बड़ा हिस्सा खुला और व्यवस्थित दिख सकता है. अभियान का प्रभाव धीरे-धीरे स्पष्ट होगा.

 

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