रांची : केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देशभर के उद्योगों के लिए नई वर्गीकरण प्रणाली लागू कर दी है। इस प्रणाली का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण को अधिक वैज्ञानिक और पारदर्शी बनाना है। नए नियमों के अनुसार सभी उद्योगों को प्रदूषण सूचकांक के आधार पर पांच श्रेणियों—लाल, नारंगी, हरा, सफेद और नीली—में बांटा जाएगा। इससे न केवल उद्योगों की निगरानी आसान होगी, बल्कि पर्यावरण की गुणवत्ता में भी सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
सीपीसीबी का कहना है कि लाल श्रेणी वाले उद्योगों की निगरानी सबसे सख्त तरीके से होगी, क्योंकि ये उच्च प्रदूषण खतरा पैदा करते हैं। वहीं सफेद श्रेणी में आने वाले उद्योग पर्यावरण के लिए लगभग सुरक्षित माने जाते हैं, जिनकी मॉनिटरिंग सीमित स्तर पर की जाएगी। इसके साथ ही उद्योगों के जल, वायु और ठोस अपशिष्ट प्रदूषण को विशेष रूप से अंकित कर प्रदूषण सूचकांक तैयार किया जाएगा। इससे उद्योगों की गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण संभव होगा।
नई व्यवस्था में एक नई नीली श्रेणी भी जोड़ी गई है, जिसे घरेलू गतिविधियों से जुड़े अपशिष्ट प्रबंधन के लिए निर्धारित किया गया है। इस श्रेणी के उद्योगों को संचालन की सहमति दो साल अतिरिक्त अवधि के लिए मिलेगी। कुल 403 क्षेत्रों में उद्योगों का नया वर्गीकरण किया गया है, जो पहले के 257 क्षेत्रों की तुलना में काफी अधिक है। इससे देशभर में पर्यावरणीय निगरानी तंत्र और अधिक व्यापक होगा।



