यह कार्यक्रम आदिवासी कल्याण समिति की ओर से आयोजित किया गया था। मंगरा पाहन ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार जतरा स्थल की पूजा-अर्चना कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
जतरा में हरमु, कोकर, हिंदपीढ़ी, हेहल, बजरा समेत आसपास के कई इलाकों के खोड़हा समुदाय के लोग शामिल हुए। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर नाच-गान का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। स्थानीय लोग रंग-बिरंगे परिधानों में सजकर इस पारंपरिक पर्व में शामिल हुए।
डुम्बु जतरा में स्थानीय कलाकारों अनिल मुंडा, अभिनाश नायक, प्रीति बारला और सरस्वती बुनकर ने शानदार प्रस्तुति दी। नागपुरी और कुड़ुख गीतों पर झूमते लोगों ने उत्सव को यादगार बना दिया। आयोजन को सफल बनाने में अतूल प्रभात केरकेट्टा, मनोज भगत, स्वराज, राज उरांव और रोहित खलखो की अहम भूमिका रही।


