दिल्ली HC ने मूक-बधिर खिलाड़ियों के लिए पुरस्कार मानदंड मांगे.
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने खेल पुरस्कारों के संबंध में एक ऐतिहासिक निर्देश जारी करते हुए केंद्र सरकार से कहा है.
वह सुन नहीं सकने वाले (Hearing-impaired) खिलाड़ियों को ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के लिए विचार करने हेतु स्पष्ट मानदंड (Criteria) तैयार करे। कोर्ट का यह आदेश दिव्यांग एथलीटों के अधिकारों और समानता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने में सहायक होगा।
यह फैसला अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विख्यात मूक-बधिर पहलवान और अर्जुन पुरस्कार विजेता वीरेंद्र सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया गया। वीरेंद्र सिंह कई बार के डेफलिंपिक्स (Deaflympics) स्वर्ण पदक विजेता हैं। उन्होंने एक अन्य मूक-बधिर खिलाड़ी के साथ मिलकर याचिका दायर की थी, जिसमें शिकायत की गई थी कि पुरस्कार चयन समितियों द्वारा दिव्यांग खिलाड़ियों के प्रदर्शन को मुख्यधारा के एथलीटों के समान मान्यता नहीं दी जाती है। याचिका में समान अवसर और भेदभाव रहित मूल्यांकन की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और खेल मंत्रालय से चार सप्ताह के भीतर विशिष्ट और समावेशी मानदंड प्रस्तुत करने को कहा है, जो सभी श्रेणियों के एथलीटों के प्रदर्शन का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करें। कोर्ट ने टिप्पणी की कि दिव्यांगता किसी खिलाड़ी की क्षमता या उपलब्धियों को कम नहीं करती है। यह आदेश भारत में दिव्यांग खेल समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है और यह सुनिश्चित करेगा कि उनका असाधारण समर्पण और उपलब्धियाँ देश के सर्वोच्च खेल सम्मान से वंचित न रहें।



