नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली की सुबह लोगों की आँखें जहरीली हवा के बीच खुलीं, जिसके चलते समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया। शहर के कई इलाकों में स्मॉग की घनी चादर छा गई, जिससे दृश्यता काफी कम हो गई और लोगों को सांस लेने में दिक्कत महसूस हुई। पटाखों के धुएं और पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के कारण वायु प्रदूषण खतरनाक स्तर पर पहुँच गया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई निगरानी स्टेशनों पर वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ (सीवियर) श्रेणी में दर्ज की गई। आनंद विहार में एक्यूआई 414 और वज़ीरपुर में 412 दर्ज किया गया, जो सबसे अधिक प्रदूषित इलाकों में से थे। ‘बहुत खराब’ और ‘गंभीर’ श्रेणी की हवा स्वस्थ लोगों को भी प्रभावित कर सकती है और पहले से ही बीमार लोगों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है। चिकित्सकों ने लोगों को घर के अंदर रहने और मास्क पहनने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ठंड बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। पटाखों पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद भी बड़ी संख्या में पटाखे चलाए गए, जिससे प्रदूषण को और बढ़ावा मिला। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रैप (GRAP) योजना को लागू करने की बात कही है। यह स्थिति एक बार फिर पर्यावरण संरक्षण और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए स्थायी समाधानों की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करती है।


