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भारत की मजबूती हेतु नीतियों में व्यापक प्रतिनिधित्व जरूरी: उपराष्ट्रपति।

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को कहा कि भारत की नीतियों का विकास अब और अधिक प्रतिनिधित्वात्मक स्वरूप में होना चाहिए।

वरिष्ठ भाजपा नेता राम माधव की पुस्तक ‘न्यू वर्ल्ड: 21वीं सदी का वैश्विक व्यवस्था और भारत’ के विमोचन कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच अधिक संवाद आवश्यक है ताकि राष्ट्रीय हितों को मजबूती मिल सके।

धनखड़ ने कहा, “हमारे देश में दुश्मन नहीं हैं, दुश्मन बाहर हैं। कुछ दुश्मन भीतर भी हैं, जो बाहरी शक्तियों से प्रभावित हैं और भारत विरोधी गतिविधियों में संलिप्त हैं।” उन्होंने भारतीय भाषाओं की विविधता को गर्व का विषय बताया और कहा कि भारत के पास 22 मान्यता प्राप्त भाषाएं हैं, जो लोकतंत्र को समृद्ध करती हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नीति निर्माण में देश के विभिन्न विचार समूहों और राजनीतिक दलों के थिंक टैंक्स के बीच सामंजस्य होना चाहिए।

उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत की उन्नति के मार्ग में कई बाहरी और आंतरिक चुनौतियाँ मौजूद हैं, जो देश को भाषा, विचारधारा और संस्कृति के नाम पर बांटने की कोशिश करती हैं। “हमें इन षड्यंत्रकारी ताकतों से सावधान रहना होगा और देश की मजबूती के लिए एकजुट होकर कार्य करना होगा। ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना आज की सरकार का मूल मंत्र है और यही भारत को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाएगा,” उन्होंने कहा।

 

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