देब्रीगढ़ अभयारण्य में गौर की आबादी में उल्लेखनीय वृद्धि.
ओडिशा का देब्रीगढ़ वन्यजीव अभयारण्य एशियाई गौर (इंडियन बाइसन) की आबादी में एक महत्वपूर्ण वृद्धि का गवाह बन रहा है।
हाल ही में वन्यजीव प्रभाग द्वारा जारी आंकड़ों से पता चला है कि अभयारण्य के भीतर अब 788 गौर निवास कर रहे हैं, जो पिछले छह महीनों में 129 गौर की एक उल्लेखनीय वृद्धि है। यह खबर वन्यजीव संरक्षणवादियों और अधिकारियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
यह वृद्धि अभयारण्य में प्रभावी संरक्षण प्रयासों और सुरक्षित आवास उपलब्धता का परिणाम है। गौर, जो भारत के सबसे बड़े गो जातीय पशु हैं, को अक्सर आवास के नुकसान और अवैध शिकार जैसे खतरों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में देब्रीगढ़ में उनकी संख्या में इजाफा होना अभयारण्य के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य और वहां चल रहे वन्यजीव प्रबंधन कार्यक्रमों की सफलता को दर्शाता है।
अधिकारियों का कहना है कि यह सकारात्मक रुझान अभयारण्य के भीतर सुरक्षित वातावरण बनाए रखने, शिकार विरोधी उपायों को मजबूत करने और स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में शामिल करने का फल है। गौर की बढ़ती आबादी देब्रीगढ़ को एक महत्वपूर्ण वन्यजीव स्थल के रूप में स्थापित करती है और भारत में जैव विविधता संरक्षण के प्रयासों को और मजबूत करती है।



