बेलगावी, कर्नाटक: कर्नाटक के बेलगावी जिले में आवारा कुत्तों का आतंक एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन गया है। पिछले नौ महीनों के चौंकाने वाले आंकड़ों के अनुसार, जिले में 16,000 से अधिक लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा है, जबकि आठ लोगों की मौत रेबीज के कारण हो गई है। ये आंकड़े स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाहियों को उजागर करते हैं और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर देते हैं। यह गंभीर स्थिति दर्शाती है कि शहर और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
इन हमलों में बच्चे और बुजुर्ग आसान शिकार बन रहे हैं, क्योंकि कई क्षेत्रों से लगातार पीछा करने और हमला करने की खबरें आ रही हैं। शहर के कई रिहायशी इलाकों में आवारा कुत्तों के झुंडों का घूमना आम हो गया है, जिससे सुबह-शाम बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि रेबीज से हुई आठ मौतें इस बात का प्रमाण हैं कि एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) की उपलब्धता और लोगों में जागरूकता के बावजूद स्थिति नियंत्रण से बाहर है। प्रशासन पर आरोप लग रहा है कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया गया है, जिसके कारण कुत्तों की आबादी तेजी से बढ़ी है।
जिला प्रशासन ने अब इस संकट से निपटने के लिए एक आपातकालीन कार्य योजना तैयार करने की घोषणा की है। इस योजना में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रमों को तेज करना शामिल है, साथ ही उन क्षेत्रों की पहचान करना भी शामिल है जहाँ हमले अधिक हो रहे हैं। स्थानीय निकायों को नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन इस समस्या को प्राथमिकता के आधार पर हल करे, ताकि बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित माहौल मिल सके। यह संकट बेलगावी के नागरिकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।


