पहलगाम में हुए जघन्य आतंकवादी हमले के बाद कश्मीर का पर्यटन क्षेत्र एक मूक संकट का सामना कर रहा है, क्योंकि पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जिससे इस उद्योग पर निर्भर लोगों की आजीविका खतरे में पड़ गई है और कर्ज का बोझ बढ़ रहा है। मनोचिकित्सकों का कहना है कि उन्होंने ऐसे मरीजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखी है जो कई लक्षणों से पीड़ित हैं और जिनकी रोजी-रोटी पर्यटन पर निर्भर थी।
अप्रैल में हुए इस भयावह हमले के बाद से, जिसमें कई निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई, कश्मीर आने वाले पर्यटकों की संख्या में तेजी से कमी आई है। होटल खाली पड़े हैं, शिकारा वाले और टैक्सी ड्राइवर बेरोजगार बैठे हैं, और हस्तशिल्प विक्रेता ग्राहकों का इंतजार कर रहे हैं। पर्यटन से जुड़े व्यवसायों ने पहले ही भारी नुकसान की सूचना दी है, और कई अब अपने ऋण चुकाने की क्षमता को लेकर चिंतित हैं।
इस संकट का लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। मनोचिकित्सकों के अनुसार, पर्यटन पर निर्भर रहने वाले कई लोग अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्हें भविष्य की अनिश्चितता और कर्ज के बढ़ते बोझ की चिंता सता रही है। सरकार और संबंधित अधिकारियों से उम्मीद की जा रही है कि वे इस संकट की घड़ी में पर्यटन उद्योग और इससे जुड़े लोगों को राहत प्रदान करने के लिए उचित कदम उठाएंगे।



