जहां चाह, वहां राह: ओडिशा के इस गांव ने झरने के पानी से जल संकट किया दूर.
ओडिशा के बदबहाल गांव के ग्रामीण लंबे समय से जल संकट से जूझ रहे थे।
उनके लिए उम्मीद की एक किरण तब जगी जब नाबार्ड ने विविधीकरण-आधारित सिंचाई परियोजना के साथ उनसे संपर्क किया, और फिर जो हुआ वह इतिहास बन गया। इस परियोजना के तहत, गांव वालों ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामुदायिक प्रयास से पास के झरनों के पानी का उपयोग करके जल संकट को सफलतापूर्वक हल कर लिया।
नाबार्ड की मदद से, ग्रामीणों ने झरने के पानी को एकत्रित करने और उसे गांव तक पहुंचाने के लिए एक कुशल सिंचाई प्रणाली विकसित की। उन्होंने पाइपलाइनें बिछाईं और छोटे जलाशय बनाए, जिससे पूरे गांव में सिंचाई और पीने के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित हुई। इस पहल ने न केवल गांव के जल संकट को दूर किया, बल्कि कृषि उत्पादन को भी बढ़ावा दिया, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई।
बदबहाल गांव की यह कहानी यह साबित करती है कि यदि दृढ़ इच्छाशक्ति और सामुदायिक एकजुटता हो तो किसी भी मुश्किल को पार किया जा सकता है। झरने के पानी का बुद्धिमानी से उपयोग करके, इस गांव ने न केवल अपनी जल समस्या का समाधान किया, बल्कि आत्मनिर्भरता और सामुदायिक विकास का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत किया है।


