इन माओवादियों ने पुलिस अधीक्षक गौरव राय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्मृति राजनाला और अन्य अधिकारियों की उपस्थिति में डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) कार्यालय पहुंचकर अपने हथियार समर्पित किए। इस पहल को क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ जारी प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों में कुछ ऐसे भी हैं जो विभिन्न नक्सली गतिविधियों में सक्रिय थे। उन्होंने ‘लोन वर्राटू’ अभियान की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने में मदद मिलेगी।
यह घटना दर्शाती है कि ‘लोन वर्राटू’ अभियान, जो माओवादियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन जीने के लिए प्रोत्साहित करता है, प्रभावी साबित हो रहा है। पुलिस और प्रशासन क्षेत्र में शांति और विकास के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं, और माओवादियों का आत्मसमर्पण इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


