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थोड़ा सियासी फायदा लेकिन कीमत बड़ी चुकानी होगी… रेवड़ी कल्चर पर PM ने फिर देश को किया आगाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर से राजनीतिक दलों की तरफ से रेवड़ी कल्चर को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। पीएम मोदी साफ कहा कि गैर-जिम्मेदाराना वित्तीय और लोकलुभावन नीतियों के अल्पकालिक राजनीतिक परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन लंबी अवधि में इसकी बड़ी सामाजिक और आर्थिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। पीटीआई को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में प्रधानमंत्री ने कहा कि नौ साल की राजनीतिक स्थिरता के चलते कई सुधार हुए हैं और विकास इसका स्वाभाविक प्रतिफल है। यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी ने मुफ्त की घोषणाओं को लेकर बात कही है।

मुफ्त की रेवड़ी पर बेतहाशा खर्च

पिछले साल अक्टूबर में भी पीएम मोदी ने इस विषय पर अपनी बात रखी थी। बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री ने कहा था कि करदाता जब देखता है कि उससे वसूले गए रुपयों से मुफ्त की रेवड़ी बांटी जा रही है तो वह दुखी होता है। प्रधानमंत्री का कहना था कि अनेक करदाता मुझे खुलकर चिट्ठी लिख रहे हैं। उनका कहना था कि मुझे इस बात की खुशी है कि एक बड़ा वर्ग रेवड़ी कल्चर से देश को मुक्ति दिलाने के लिए कमर कस रहा है। प्रधानमंत्री ने इस साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले भी कहा था कि हमें रेवड़ी कल्चर (मुफ्त की चीजें देने की घोषणा) से मुक्त होना होगा। पीएम ने कहा था कि मुफ्त की रेवड़ी की राजनीति की वजह से कई राज्य बेतहाशा खर्च कर रहे हैं। वे लोग ऐसा अपनी दलगत भलाई के लिए कर रहे हैं। पीएम का कहना था कि इससे राज्य डूबते चले जा रहे हैं। साथ ही ने वाली पीढ़ियों का भी ये खा जा रहे हैं।

स्थिर सरकार की वजह से विकास

पीएम मोदी ने कहा, 2014 से पहले के तीन दशकों में, देश ने कई सरकारें देखीं जो अस्थिर थीं और इसलिए, बहुत कुछ करने में असमर्थ थीं। उन्होंने कहा, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में, लोगों ने (भाजपा को) एक निर्णायक जनादेश दिया है। इससे एक स्थिर सरकार, पूर्वानुमानित नीतियां और समग्र दिशा में स्पष्टता आई है। उन्होंने कहा कि यह स्थिरता ही कारण है कि पिछले नौ वर्षों में कई सुधार लाए गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि अर्थव्यवस्था, शिक्षा, वित्तीय क्षेत्र, बैंक, डिजिटलीकरण, कल्याण, समावेशन और सामाजिक क्षेत्र से संबंधित इन सुधारों ने एक मजबूत नींव रखी है। ऐसे में विकास एक इसका फल है। पीएम ने कहा कि भारत की तरफ से हुई तेज और निरंतर प्रगति ने दुनिया भर में दिलचस्पी पैदा की है। प्रधानंत्री ने कहाकि कई देश हमारी विकास कहानी को बहुत करीब से देख रहे हैं।

तेज आर्थिक रफ्तार की बताई वजह

पीएम मोदी ने रविवार को मुद्रास्फीति के खिलाफ लड़ाई में केंद्रीय बैंकों द्वारा नीतिगत रुख और प्रत्येक देश द्वारा नीतिगत कार्रवाइयों के समय पर और स्पष्ट संचार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसका उद्देश्य है कि यह अन्य देशों पर नकारात्मक असर को रोक सके। उन्होंने कहा कि जबकि अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाएं आर्थिक मंदी, पुरानी कमी, उच्च मुद्रास्फीति और बुजुर्ग आबादी का सामना कर रही हैं, भारतीय अर्थव्यवस्था को सबसे बड़ी युवा आबादी के साथ सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है। उन्होंने कहा कि विश्व इतिहास में लंबे समय तक, भारत दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में से एक था। बाद में, विभिन्न प्रकार के उपनिवेशवाद के प्रभाव के कारण, हमारी वैश्विक उपस्थिति कम हो गई।

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