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फिर खुली ब्रह्मेश्वर मुखिया हत्याकांड की फाइल, 11 साल बाद पूर्व MLC हुलास पाण्डेय का आया नाम, जानें पूरा मामला

बिहार में 1 जून 2012 का दिन इतिहास में दर्ज है। नक्सलियों और सवर्णों के बीच दशकों तक चले खूनी संघर्ष का गवाह रहे ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या हुई थी। रणवीर सेना नाम का संगठन सवर्णों के हिमायती होने का दावा करता था। इसके सुप्रीमो ब्रह्मेश्वर मुखिया थे। ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या के बाद जो हुआ था, उसके गवाह कई लोग हैं। लोग बताते हैं कि उनको केवल लोगों की हुजूम और ब्रह्मेश्वर मुखिया ही याद आते हैं। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता था कि आरा से लेकर पटना तक उमस भरी गर्मी में शव यात्रा में लाखों लोग चल रहे थे। रणवीर सेना के बारे में कहा जाता है कि ये भूमिहार जाति का संगठन था लेकिन सवर्ण समाज की दूसरी जातियों का भी समर्थन हासिल था। जिसके चलते रणवीर सेना काफी विस्तार ले चुका था। धीरे-धीरे पूरे मध्य बिहार में नक्सलियों और अन्य प्रतिबंधित संगठनों के खिलाफ सवर्णों का मुखर आवाज बन गया। इसकी अगुवाई ‘मुखिया जी’ (ब्रह्मेश्वर सिंह) अपने अन्य सहयोगियों के साथ करने में लगे थे। तभी अचानक सुबह में टहलने के वक्त 1 जून 2012 को आरा शहर के नवादा थाने के कतीरा में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

पूर्व MLC हुलास पाण्डेय समेत 8 आरोपी

बिहार में कास्ट सर्वे की रिपोर्ट और उस पर आधारित आरक्षण लागू होने के कुछ समय बाद ही जातीय राजनीति हिलोरे मारने लगी। बिहार के सबसे बड़े हत्याकांड में से एक ने सवाल खड़े कर दिए हैं। लालू-राबड़ी शासनकाल के दौरान जातीय संघर्ष में अगड़ी जाति, खासकर भूमिहारों की कमान संभालने वाले ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई की ओर से नया नाम जोड़ा गया है। मुख्य आरोपी के रूप में पूर्व विधान पार्षद हुलास पाण्डेय का नाम इसमें शामिल किया गया है। चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष हैं। पूर्व विधायक सुनील पाण्डेय के भाई हैं हुलास पाण्डेय। सुनील पाण्डेय भी अपने जमाने में कुख्यात रहे हैं।

आरा जिला एवं सत्र न्यायालय में सीबीआई ने सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। सेशन जज-3 के कोर्ट में दायर चार्जशीट में पूर्व एमएलसी हुलास पाण्डेय समेत आठ लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया है। जिन लोगों को अभियुक्त बनाया गया है, उनमें अभय पाण्डेय, नंद गोपाल पाण्डेय उर्फ फौजी, रितेश कुमार उर्फ मोनू, अमितेश कुमार पाण्डेय उर्फ गुड्डू पाण्डेय, प्रिंस पाण्डेय, बालेश्वर पाण्डेय और मनोज राय उर्फ मनोज पाण्डेय का नाम शामिल हैं। ब्रह्मेश्वर सिंह उर्फ मुखिया जी के हत्या के 11 साल बाद सीबीआई ने पूर्व विधान पार्षद हुलास पाण्डेय को मुख्य अभियुक्त बनाया है।

मॉर्निंग वॉक के वक्त हुई थी ब्रह्मेश्वर मुखिया की हत्या

रणवीर सेना सुप्रीमो रहे ब्रह्मेश्वर मुखिया को आरा शहर में गोलियों से भून डाला गया। मूल रूप से भोजपुर जिले के पवना थाना क्षेत्र के खोपीरा गांव निवासी ब्रह्मेश्वर मुखिया का घर आरा शहर के कतीरा-स्टेशन रोड में भी है। 1 जून 2012 को रोज की तरह सुबह में मुखिया जी अपने आवास की गली में ही टहल रहे थे, इसी दौरान सुबह के करीब चार-साढ़े चार बजे गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। ब्रह्मेश्वर मुखिया अपने इलाके के काफी चर्चित व्यक्ति थे और वो तकरीबन 30 वर्षों तक अपने पंचायत के मुखिया रहे। बाद में वो सवर्णों पर हो रहे कथित जुल्म और अत्याचार के खिलाफ रणवीर सेना से जुड़ गए। इसके खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ी। रणवीर सेना को सवर्णों का ‘सेना’ माना जाता था।

90 के दशक में किसानों की जमीन और घर पर नक्सली कब्जा कर रहे थे। उसी काल खंड में ब्रह्मेश्वर मुखिया ने कथित तौर पर लड़ाई लड़के सवर्णों का सम्मान बचाने का काम किया था। इस दौरान कई बड़े और चर्चित नरसंहार हुए। जिसमें बाथे से लेकर बथानी और सरथुआ का नाम शामिल है। उसमें उनका नाम आया और उन्होंने जेल की सजा भी काटी। ब्रह्मेश्वर मुखिया बिहार में सवर्णों के प्रतिबंधित संगठन रणवीर सेना के सुप्रीमो थे।

सीएम नीतीश को रोकनी पड़ी थी अपनी विकास यात्रा

ब्रह्मेश्वर मुखिया पर 2012 तक 277 लोगों की हत्या और उनसे जुड़े 22 अलग-अलग मामलों में केस दर्ज थे। 16 मामलों में सबूत के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया था। जबकि बाकी 6 मामलों में मुखिया जी जमानत पर थे। उनको 29 अगस्त 2002 को पटना के एक्जीबिशन रोड से पुलिस ने गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद ब्रह्मेश्वर मुखिया ने 9 साल तक जेल की सजा काटी। 8 जुलाई 2011 को आरा के मंडल कारा से उनकी रिहाई हुई।

जेल से छुटने के बाद ब्रह्मेश्वर मुखिया आरा शहर में ही ज्यादा रहते थे। इस दौरान उन्होंने लगातार किसान और मजदूरों को संगठित करने का काम किया। उनका मानना था कि जब ये दोनों एक हो जाएंगे तो हम सरकार से अपना हक वाजिब तरीके से ले सकेंगे। इसी दौरान कतीरा स्थित आवास के पास ही उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद पूरा बिहार जल उठा था। आगजनी तोड़फोड़ हंगामा थमने का नाम नहीं ले रहा था। उसी दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विकास यात्रा पर निकले थे। आरा में भी उनकी यात्रा होने वाली थी लेकिन इस घटना के बाद उनकी ये यात्रा स्थगित हो गई थी।

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