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कोडरमा सरकारी जमीन कब्जा मामले पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी.

अधूरे शपथ पत्र पर राज्य सरकार से मांगी विस्तृत जानकारी.

रांची स्थित हाईकोर्ट ने कोडरमा जिले के चंदवाड़ा क्षेत्र की सरकारी जमीन मामले को गंभीरता से लिया है। यह मामला लगभग 87.41 एकड़ सरकारी भूमि पर कथित कब्जे से जुड़ा है। जनहित याचिका में भू-माफिया द्वारा अतिक्रमण का आरोप लगाया गया है। मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने सर्कल ऑफिसर अशोक कुमार भारती के शपथ पत्र पर नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि शपथ पत्र में कई जरूरी तथ्य स्पष्ट नहीं हैं। जमीन की वास्तविक स्थिति का पूरा विवरण नहीं दिया गया। कोर्ट ने जानकारी को अधूरा बताया। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अदालत ने सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।

कोर्ट ने पाया कि सरकारी जमीन का कितना हिस्सा खाली है, यह नहीं बताया गया। विवादित जमीन का सटीक क्षेत्रफल भी स्पष्ट नहीं किया गया। रिकॉर्ड में कोई नक्शा या फोटो प्रस्तुत नहीं किया गया। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की स्थिति भी अस्पष्ट पाई गई। सरकार ने शपथ पत्र में कहा था कि अधिकांश जमीन खाली है। साथ ही मामूली हिस्से को विवादित बताया गया। उस हिस्से से कब्जा हटाने की प्रक्रिया जारी होने की बात कही गई। लेकिन कोर्ट ने इन दावों को पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने विस्तृत तथ्य प्रस्तुत करने को कहा। मामले को गंभीर प्रशासनिक लापरवाही से जोड़ा गया।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को नया शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। यह शपथ पत्र 2 अप्रैल 2026 तक जमा करना होगा। इसमें जमीन का पूरा क्षेत्रफल, नक्शा और फोटो शामिल करना होगा। कोर्ट ने माप और विवरण स्पष्ट देने को कहा। याचिकाकर्ता को भी सबूतों के साथ शपथ पत्र देने की अनुमति मिली। अगली सुनवाई 9 अप्रैल 2026 को तय की गई है। याचिकाकर्ता अरविंद कुमार सिंह ने प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि शिकायतों के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है। अदालत के निर्देश से मामले में नई गति आने की उम्मीद है।

 

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