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डेटा के फांस में फंसेगी नीतीश सरकार? सुप्रीम कोर्ट से आ गया ये निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से कहा कि वो कास्ट सर्वे की पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करे, ताकि असंतुष्ट लोग इसके निष्कर्षों को चुनौती दे सकें। जज संजीव खन्ना और जज दीपांकर दत्ता की बेंच ने उन याचिकाकर्ताओं को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया, जिन्होंने जाति सर्वेक्षण और इस तरह की कवायद करने के बिहार सरकार के फैसले को बरकरार रखने वाले पटना हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी है। पीठ ने कहा कि अंतरिम राहत का कोई सवाल ही नहीं है, क्योंकि उनके (सरकार के) पक्ष में उच्च न्यायालय का आदेश है। अब, जब विवरण सार्वजनिक मंच पर डाल दिया गया है, तो दो-तीन पहलू बचे हैं। पहला कानूनी मुद्दा है- उच्च न्यायालय के फैसले का औचित्य और इस तरह की कवायद की वैधता के बारे में।

आरक्षण मामले पर हाई कोर्ट जाना होगा: SC

याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर वकील राजू रामचंद्रन ने कहा कि चूंकि सर्वेक्षण का डेटा सामने आ गया है, अधिकारियों ने इसे अंतरिम रूप से लागू करना शुरू कर दिया है और एससी, एसटी, अन्य पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षण को मौजूदा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत कर दिया है। पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई की जरूरत है। जहां तक आरक्षण बढ़ाने की बात है, तो आपको इसे उच्च न्यायालय में चुनौती देनी होगी। रामचंद्रन ने अदालत से कहा कि इसे पहले ही उच्च न्यायालय में चुनौती दी जा चुकी है।

एडवोकेट राजू रामचंद्रन ने कहा कि मुद्दा महत्वपूर्ण है, और चूंकि राज्य सरकार डेटा पर काम कर रही है, इसलिए मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध किया जाना चाहिए, ताकि याचिकाकर्ता अंतरिम राहत के लिए दलील दे सकें। इस पर पीठ ने कहा कि कैसी अंतरिम राहत? उनके (बिहार सरकार के) पक्ष में उच्च न्यायालय का फैसला है।

‘डेटा का अलग-अलग डिटेल चिंता का विषय’

बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि अलग-अलग डिटेल सहित डेटा को सार्वजनिक कर दिया गया है। कोई भी इसे जुड़े वेबसाइट पर देख सकता है। इस पर न्यायमूर्ति संजीव खन्ना ने कहा कि मैं जिस चीज को लेकर अधिक चिंतित हूं, वो डेटा के अलग-अलग विवरण की उपलब्धता है। सरकार किस हद तक डेटा को रोक सकती है। आप देखिए, डेटा का पूरा डिटेल सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि कोई भी इससे निकले निष्कर्ष को चुनौती दे सके। जब तक ये सार्वजनिक नहीं होगा, वे इसे चुनौती नहीं दे सकते।

BJP ने कास्ट सर्वे डेटा को बताया है फर्जी

बिहार में मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नीतीश कुमार सरकार पर जाति सर्वेक्षण कराने में अनियमितताओं का आरोप लगाया है और एकत्र किए गए आंकड़ों को ‘फर्जी’ बताया है। इसके बाद, पीठ ने बिहार सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान से जाति सर्वेक्षण पर एक रिपोर्ट दाखिल करने को कहा और मामले की अगली सुनवाई के लिए पांच फरवरी की तारीख निर्धारित कर दी।

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