ASI ने कहा, पांडवों के ज़माने के नहीं हैं पुराने किले की खुदाई में मिले अवशेष
पुराने किले में ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की चल रही खुदाई में 1100-1200 बीसी के पेंटेड ग्रे वेयर कल्चर (पीजीडब्ल्यू) के मिट्टी के बर्तन के टुकड़ों के रूप में मिले अवशेष पांडवकालीन इंद्रप्रस्थ के नहीं हैं। इंद्रप्रस्थ की खोज हो पाएगी या नहीं? अभी इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। एएसआई के डायरेक्टर डॉ. वसंत स्वर्णकार ने बताया कि खुदाई के लिए जमीन का क्षेत्र बड़ा करने की जरूरत हो सकती है।वसंत स्वर्णकार ने बताया कि अभी हम पुराना किला के 15 मीटर ऊंचे टीले के करीब 5X5 मीटर के जिस हिस्से में खुदाई कर रहे हैं, उसमें कुछ स्ट्रक्चर आ गए हैं। इस कारण खुदाई के लिए करीब 2X3 मीटर के क्षेत्र में आ गए हैं। वहां पर हमें पीजीडब्ल्यू कल्चर के कुछ अवशेष मिले हैं। इस समय के काल को पुरातत्व विशेषज्ञ बीबी लाल और दूसरे इतिहासकारों ने महाभारत काल से जोड़ा है। ग्रे कलर के पेंटेड मिट्टी के बर्तन उस काल की पहचान में से एक हैं। टीले के उस हिस्से की खुदाई 2013-14 और 2017-18 में दो बार हो चुकी है। उस समय तक मौर्यकालीन सभ्यता के अवशेष मिले थे। इस साल जनवरी से उसी हिस्से की फिर से शुरू हुई खुदाई में प्री मौर्य काल (600बीसी) के अवशेष मिलने शुरू हुए हैं।इसी कड़ी में पीजीडब्ल्यू कल्चर के अवशेष शुरुआती स्तर पर मिले हैं। इससे साफ है कि इस जगह पर 1100-1200बीसी के समय में सामाजिक गतिविधियां थीं। मगर इसे महाभारत काल के किसी शहर या पांडव के इंद्रप्रस्थ से जोड़ें, तो यह जल्दबाजी है। ऐसी कोई चीज नहीं मिली है। इसी साल कुंती मंदिर के सामने की जमीन पर भी खुदाई शुरू हुई है। एएसआई के डायरेक्टर ने बताया कि खुदाई के दायरे को बढ़ाकर मानव के होने से पहले की जमीन ढूंढना चाहते हैं। पुराना किला में खुदाई का दायरा बढ़ाना चाहते हैं, ताकि महाभारत काल से पहले के कल्चर का भी पता लग सके।




