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केके पाठक के हटते ही कहर बनकर टूट रहे शिक्षक, निरीक्षण करने पहुंचे DEO की पिटाई, सिर से निकलने लगा खून

सूबे के साढ़े तीन लाख नियोजित शिक्षक एक दशक तक कई तरह के टॉर्चर झेलते रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा टॉर्चर था, समय पर वेतन का नहीं मिलना। इसके अलावा वेतन के लिए जिला शिक्षा विभाग के कार्यालय में चक्कर लगाना। उसके बाद भी कई मामलों यथा एरियर सहित छुट्टी के आवेदन और बाकी स्वीकृति के लिए नियोजित शिक्षक और बाकी शिक्षक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की चिरौरी करते दिखते थे। जी हां, ये कहना है मुजफ्फरपुर के एक सरकारी शिक्षक का। उन्होंने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पहले नियोजित शिक्षक पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से प्रताड़ित किए गए। मुखिया से लेकर बाकी जनप्रतिनिधियों ने उनका दोहन किया। शिक्षा समिति के नाम पर शिक्षकों से कई तरह के काम करवाये जाते रहे। हाल में जब केके पाठक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव बने उसके बाद से शिक्षा विभाग के अधिकारी हर गलती का ठीकरा शिक्षकों पर फोड़ने लगे।

अधिकारी मार खाएंगे-शिक्षक

शिक्षकों का कहना है कि अब जब केके पाठक केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा रहे हैं। ये उनके लिए अच्छी बात है। वे पहले भी अच्छे से पढ़ाते थे। अब भी अच्छे से पढ़ाते हैं। शिक्षकों ने बताया कि बिना पढ़ाए 17 साल और 23 सालों में मैट्रिक और इंटर का रिजल्ट बेहतर कैसे हो रहा है। उन्हीं के पढ़ाए बच्चे कैसे शिक्षक बन जा रहे हैं। शिक्षकों ने कहा कि नियोजित शिक्षकों के प्रथम चरण की बहाली 2003 में हुई। उनको नौकरी करते हुए 23 साल हो गए। जिसकी बहाली 2005 में हुई, वो 17 साल से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। रिजल्ट दे रहे हैं। बच्चे आगे बढ़ रहे हैं। उसके बाद विभिन्न तरह के आदेश और कानून लाकर शिक्षकों को तंग किया जा रहा है। शिक्षकों का गुस्सा होना जायज है। शिक्षकों ने बताया कि अब आप ही बताइए कि रोजाना कोई न कोई निरीक्षण के लिए पहुंचा रहता है। अच्छी तरह से आवभगत नहीं करने पर वेतन रोक दिया जाता है।

शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार
शिक्षकों ने कहा कि कई निरीक्षण करने आए अधिकारी शिक्षकों में फॉल्ट बताकर और हेडमास्टर को धमका कर वसूली करते हैं। शिक्षक ने कहा कि किसी भी जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय का जांच करा लीजिए। वहां यदि छुट्टी, एरियर और प्रमोशन को लेकर पैसे का खेल नहीं होता होगा, तो हम लोग आज से पढ़ाना बंद कर देंगे। केके पाठक को जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय में भ्रष्टाचार नहीं दिखा। उन्हें सिर्फ शिक्षकों को सुधारना था। अभी स्कूलों में बच्चों को बैग वाला किट मिला है। थाली मिली है। उसकी क्वालिटी और संख्या की जांच कर लीजिए। करोड़ों और लाखों का घालमेल चल रहा है। उसकी जांच करने वाला कोई नहीं है। बस शिक्षकों के ऊपर सबको डंडा चलाने आता है। अब शिक्षक बहुत जाग गए हैं। स्कूलों में आकर धमकी देने और टॉर्चर करने वालों की ऐसे ही पिटाई होगी।

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