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केके पाठक का ऑर्डर नियोजित शिक्षकों पर बेअसर, छुट्टी की मनाही और FIR की चेतावनी के बीच हो गया बड़ा खेल

बिहार के नियोजित शिक्षकों ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को ठेंगा दिखा दिया। सरकारी ओहदा पाने के लिए सक्षमता परीक्षा पास करने की अनिवार्यता की शर्त न मानने की जिद पर अड़े शिक्षकों ने केके पाठक की एफआईआर दर्ज करने की चेतावनी की परवाह नहीं की। प्रदर्शन किया, मशाल जुलूस निकाला और पटना में विधानसभा का घेराव करने भी पहुंच गए। पुलिस ने उन पर लाठी-डंडे बरसाए, लेकिन शिक्षक अड़े रहे। आखिरकार शिक्षा मंत्री का दायित्व निभा रहे विजय चौधरी को आश्वासन देना पड़ा कि वे उनके साथ 15 फरवरी को बैठ कर बात करेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि तीन बार में सक्षमता परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों की नौकरी जाने का फैसला सरकार ने नहीं लिया है। यह विभागीय आदेश है। किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने का आश्वासन भी उन्होंने दे दिया।

चेतावनी का अब क्या होगा ?

अब सवाल उठता है कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपने तरह-तरह के फरमानों से आतंक मचा देने वाले केके पाठक के उन फरमानों का क्या होगा, जो उन्होंने नियोजित शिक्षकों को लेकर जारी किए हैं। क्या वे फिर बैकफुट पर आने वाले हैं? नियोजित शिक्षकों के लिए सक्षमता परीक्षा होने वाली है। पहली परीक्षा की तिथि घोषित कर दी गई है। पहली परीक्षा 26 फरवरी को होनी है। नियोजित शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। उनका विरोध इस बात को लेकर है कि सरकार ने उन्हें सरकारी दर्जा देने की बात कही थी, लेकिन सक्षमता परीक्षा पास करने की शर्त थोप दी गई। शिक्षा विभाग के आदेश के मुताबिक नियोजित शिक्षक तीन बार सक्षमता परीक्षा दे सकते हैं। उन्हें किसी एक परीक्षा में उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा। जो परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे, उन्हें हटा दिया जाएगा। शिक्षकों में इसी बात को लेकर उबाल है।

शिक्षकों में भारी गुस्सा

नियोजित शिक्षकों ने इसके लिए आंदोलन छेड़ दिया है। पहले धरना-प्रदर्शन स्थानीय स्तर पर किया। फिर 13 फरवरी को विधानसभा घेराव के लिए पटना पहुंच गए। पूर्व संध्या पर शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। अगले दिन विधानसभा घेराव करने पहुंचे तो पुलिस ने रोक दिया। रोकने के क्रम में पुलिस को लाठियां भी भांजनी पड़ी। शिक्षकों ने यह सब तब किया, जब शिक्षा विभाग ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी किया था कि जो शिक्षक स्कूल छोड़ कर धरना-प्रदर्शन में भाग लेते हैं, उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई जए। शिक्षकों ने इस हड़काने वाले फरमान की तनिक भी परवाह नहीं की। पटना में जुटे शिक्षक नारे लगाते रहे- केके पाठक होश में आओ।

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