अपनों के ‘पंच’ से टेंशन में नीतीश, दिल्ली में पीएम मोदी से मिलकर लेंगे रिलैक्स वाला टिप्स!
बीजेपी के रणनीतिकारों ने नीतीश कुमार के लिए नो एंट्री का बोर्ड हटा तो लिया, पर गठबंधन की हर समस्या के समाधान की चाबी अपने पास रख लिया है। नतीजतन निरंतर जदयू के रणनीतिकारों की दिल्ली दौड़ जारी है। कुछ दिन पहले जेडीयू के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह गए थे। और अब दिल्ली दौड़ की कतार में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हो गए। जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने 7 फरवरी को दिल्ली जाने वाले हैं। वहां इनकी मुलाकात पीएम नरेंद्र मोदी के साथ होगी। दो दिवसीय दौरे में नीतीश कुमार गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मिलेंगे।
दिल्ली दौड़ की वजह क्या है?
दरअसल, बिहार में एक बार फिर एनडीए की सरकार तो बन गई, पर सब कुछ 2005 की तरह स्मूथ नहीं चल रहा है। कुछ ही दिन पहले जदयू के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह दिल्ली गए थे, कुछ समस्याओं का समाधान लेकर आए थे। उनके जाने के पहले जदयू और भाजपा के बीच गृह विभाग को लेकर टकराहट जारी थी। इस कारण शपथ लेने के बाद भी विभागों का बंटवारा नहीं हो पाया था। ऐसे में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह को अपना दूत बना कर भेजा था। और तब उन समस्याओं का निदान निकला और गृह जदयू के पास रहा और अन्य विभागों का भी बंटवारा हो गया।
लेकिन इस बार राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दिल्ली यात्रा के बारे में राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि दिल्ली में होने वाली पीएम नरेंद्र मोदी और बिहार के सीएम नीतीश कुमार के बीच होने वाली बैठक महज औपचारिक नहीं है। यह भी एक मिशन है, जहां समस्याओं के पेंच सुलझाए जाने हैं। राजनीतिक गलियारों में जिन पेंच की चर्चा है, आइये जानते हैं उसके बारे में।
भीतरी टूट को लेकर आगाह करना
लालू यादव और तेजस्वी यादव की नजर कुछ भाजपा विधायकों की तरफ भी है। नीतीश कुमार के अपने इंटेलिजेंस के पास कुछ ऐसी सूचना आई है। इस मुद्दे पर बात करेंगे।



