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संकट में हैं गजराज… एक महीने में करंट लगने से 8 की मौत, 5 साल में 60 हाथियों की अलग-अलग कारणों से गई जान

गजराज यानी हाथी झारखंड का राजकीय पशु है, लेकिन राज्य में पिछले पांच वर्षों में राज्य में 60 से अधिक जंगली हाथियों की मौत हो गई। एक महीने के अंदर करंट लगने से झारखंड में आठ हाथियों की जान चली गई है। अब गिरिडीह जिले के गांडेय थाना क्षेत्र में करंट लगने से एक हाथी की मौत हो गई है। बताया गया कि बुधवार देर रात गांडेय प्रखंड की फुलची पंचायत स्थित नीमा टांड गांव से होकर हाथियों का एक झुंड गुजर रहा था, तो उनमें से एक हाथी 11 हजार वोल्ट के बिजली तार की चपेट में आ गया। घटना के बारे में वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दे दी गई है।

21 हजार वर्ग किलोमीटर इलाके में हाथियों का विचरण

वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की एक रिपार्ट के अनुसार झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और दक्षिण पश्चिम बंगाल का 21 हजार वर्ग किलोमीटर के इलाके में जंगली हाथियों का विचरण होता है। इन इलाकों में अधिकांश जंगली हाथियों की मौत का कारण करंट लगना होता है।

मुसाबनी क्षेत्र में 5 जंगली हाथियों की करंट लगने से मौत

हाथियों के इसी झुंड ने तीन दिन पहले अहिल्यापुर थाना क्षेत्र में एक 55 वर्षीय व्यक्ति और उसकी पोती को कुचलकर मार डाला था। इसके पहले 20 नवंबर को पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी वन क्षेत्र के ऊपरबांधा जंगल के पास करंट लगने से पांच हाथियों ने एक साथ दम तोड़ दिया था। इन हाथियों की मौत की जानकारी वन विभाग को अगले रोज तब हुई, जब कुछ ग्रामीण सूखी लकडियां और पत्ते लाने के लिए जंगल में गये।

चाकुलिया क्षेत्र में दो हाथियों की मौत

नवंबर के पहले हफ्ते में पूर्वी सिंहभूम के घाटशिला अनुमंडल अंतर्गत श्यामसुंदरपुर थाना क्षेत्र के मचाड़ी गांव और चाकुलिया वन क्षेत्र स्थित बडामारा पंचायत के ज्वालभांगा में दो अलग-अलग घटनाओं में करंट से दो हाथियों की मौत हुई थी। करंट से हाथियों की मौत की घटनाओं पर वन विभाग एवं बिजली विभाग एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं।

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