बस में स्मोकिंग, कैरी बैग के पैसे और मुआवजा…कंज्यूमर के तौर पर अपने अधिकार जानिए
अगर आप अपने हक को लेकर जागरुक नहीं होंगे तो चुपचाप अन्याय सहते रहेंगे। कोई आपको चूना लगाए, नुकसान पहुंचाए फिर भी आप घुटते रहेंगे, सहते रहेंगे। लेकिन अगर आप अपने हक को जानते हैं और ये भी पता है कि उनकी रक्षा के लिए क्या कानूनी तरीके हैं तो आप चुपचाप घुटेंगे नहीं, अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। ‘हक की बात’ (Haq Ki Baat) सीरीज के इस अंक में बात उपभोक्ता अधिकारों की। कंज्यूमर राइट्स हैं क्या? अगर आपके उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है तो आपको क्या करना चाहिए? उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण का कानूनी रास्ता क्या है? इन सभी सवालों का जवाब बताएंगे। आप अगर कुछ भी खरीदते हैं, सामान या सर्विस तो आप उपभोक्ता हैं। आपका ये अधिकार है कि आप जो भी सामान खरीदें या सेवा लें वह शुद्ध और गुणवत्ता वाला हो, उसकी गैरवाजिब कीमत न ली जा रही हो आदि। लेकिन कई बार ऐसा नहीं होता। ऐसी स्थिति में आप उपभोक्ता फोरम में जा सकते हैं। हाल में आए दो फैसले बताते हैं कि अगर आप अपने अधिकारों के प्रति जागरुक हैं तो आपको सहना नहीं पड़ेगा। एक मामला है बस में स्मोकिंग का। ड्राइवर और सहयात्री के धूम्रपान की वजह से एक शख्स को घुटन हो रही थी। वह इसके खिलाफ उपभोक्ता आयोग पहुंचा और अब आयोग ने संबंधित राज्य के परिवहन आयोग को उस शख्स को 15 हजार रुपये मुआवजे का आदेश दिया है। एक और चर्चित मामला मशहूर फर्नीचर रिटेलर आइकिया का है। उसने एक महिला से कंपनी के लोगो वाले कैरी बैग के लिए 20 रुपये वसूले। इसके खिलाफ महिला उपभोक्ता फोरम चली गई अब आइकिया को न सिर्फ कैरी बैग के एवज में वसूली गई राशि रिफंड करना पड़ा जबकि 3000 रुपये मुआवजा भी देना पड़ा।
बस में स्मोकिंग से हुई घुटन, यात्री को मिला मुआवजा
सबसे पहले बात बस में स्मोकिंग से परेशानी पर मिले मुआवजे की। मामला हरियाणा का है। एक शख्स ने उपभोक्ता फोरम में शिकायत की कि 3 अलग-अलग मौकों पर उसे हरियाणा रोडवेज की बस में यात्रा करते वक्त सहयात्रियों या फिर ड्राइवर की स्मोकिंग की वजह से बहुत ज्यादा घुटन और परेशानी का सामना करना पड़ा। उसने आपत्ति दर्ज कराई लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। अधिकारियों के पास भी शिकायतें की लेकिन कुछ नहीं हुआ। इसके बाद शख्स ने जिला उपभोक्ता फोरम में शिकायत की। प्रदूषित और भय के माहौल में यात्रा करने से पहुंचे मानसिक आघात और असुरक्षा के लिए मुआवजे की मांग की। डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर फोरम ने उसकी शिकायत खारिज कर दी तो चंडीगढ़ राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की। उसकी अपील स्वीकार हुई। राज्य उपभोक्ता आयोग ने हरियाणा स्टेट ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन को आदेश दिया कि तीनों मामलों में शिकायतकर्ता को 5-5 हजार रुपये यानी कुल 15 हजार रुपये मुआवजा दे। राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने भी राज्य उपभोक्ता आयोग के फैसले पर मुहर लगाई। इस तरह शख्स ने अपने हक की लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की।



