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वो काली रात जब हमेशा के लिए थम गई दिल्ली की पत्रकार की आवाज, 15 साल बाद भी सौम्या के परिवार को इंसाफ का इंतजार

सौम्या विश्वनाथन दिल्ली की एक युवा जर्नलिस्ट, अपने ऑफिस में काम निपटा रही थी। अक्सर सौम्या को लेट हो जाती थी, लेकिन उस दिन थोड़ा और ज्यादा लेट हो गई। करीब रात के 3.30 बजे सौम्या का काम पूरा हुआ और वो अपने ऑफिस से अपनी कार की तरफ बढ़ी ताकि तुरंत घर निकल सकें, लेकिन उस रात वो हुआ जिसने पूरे देश में सनसनी मचा दी। दिल्ली के एक मीडिया हाउस में नौकरी करने वाली पत्रकार को दे दी गई खौफनाक मौत।

उस रात हमेशा के लिए थम गई एक पत्रकार की आवाज

सौम्या ऑफिस से तो घर के लिए निकली लेकिन घर नहीं पहुंच पाई। वो रात सौम्या की जिंदगी की आखिरी रात थी। दूसरों की खबरे बनाने वाली पत्रकार अगली सुबह खुद एक खबर बन चुकी थी। टीवी, अखबार हर किसी में पत्रकार की मौत की खबर छपी थी। उस रात सौम्या विश्वनाथन अपनी कार मृत पाई गई। सौम्या को गोली मारी गई थी। वो अपने ऑफिस से घर के निकली थी, लेकिन दक्षिणी दिल्ली के नेल्सन मंडेला मार्ग पर सौम्या को गोली मार दी गई। वो खून से लथपथ अपनी कार में थी। माता-पिता घर में बेटी इंतजार कर रहे थे, लेकिन वो इंतजार न खत्म होने वाला था।

कार में मृत पाई गई थीं सौम्या विश्वनाथन

सौम्या मर्डर केस ने तहलका मचा दिया। पुलिस कातिल की जांच में जुट गई, लेकिन काफी समय तक कोई सुराग हाथ नहीं लगे। ये समझ नहीं आ रहा था कि इस युवा पत्रकार का दुश्मन कौन है? परिवार वाले भी इस बात से हैरान थे कि उनकी बेटी से किसकी दुश्मनी हो सकती है। जांच चलती रही, लेकिन कातिल तक पहुंचना आसान नहीं लग रहा था।

जिगिशा मर्डर केस से सुलझा सौम्या का केस

तभी साल 2009 में दिल्ली में ही एक और लड़की हत्या हुई। ये हत्या थी बीपीओ में काम करने वाली जिगिशा घोष की। जिगिशा की हत्या 18 मार्च 2009 में हुई। सुबह करीब 4 बजे जिगिशा की ऑफिस की कैब ने उन्हें उनके घर के पास उतारा। वो अपने घर जा रही थी, लेकिन कुछ लोगों ने उनका अपहरण कर लिया। तीन दिन बाद 21 मार्च को सूरजकुंड में जिगिशा की लाश मिली।

दोनों लड़कियों के कातिल एक ही थे

अब आप सोच रहे होंगे पत्रकार सौम्या मर्डर केस से जिगिशा मर्डर केस का क्या लेना देना। दरअसल जिगिशा मर्डर केस के सुलझने के बाद ही सौम्या मर्डर केस भी सॉल्व हो पाया। दोनों के कातिल एक ही थे। जिगिशा मर्डर केस की जांच में 5 लोगों के नाम सामने आए। ये नाम थे रवि कपूर, अमित शुक्ला, बलजीत मलिक, अजय कुमार और अजय सेठी। इन्होंने जिगिशा का अपहण कर उसका कत्ल किया था। कत्ल की जांच के दौरान ही पता चला कि इन्हीं पांचों ने कुछ महीने पहले सौम्या विश्वनाथन को भी मौत के घाट उतारा था। उस रात पत्रकार की जान लेने वाले यही पांचों थें।

अब 18 अक्टूबर को आएगा फैसला

दरअसल ये पांचों एक संगठित अपराध ‘गिरोह’ का हिस्सा थे और हिंसक अपराध के कई मामलों में ये शामिल रह चुके थे। पुलिस ने इन पर मकोका के तहत केस दर्ज किया। लूटपाट के मकसद से इन्होंने सौम्या और जिगिशा का मर्डर किया था। उसी दौरान इन्होंने नदीम नाम के एक और शख्स को मौत दी थी। इनपर मकोका, हत्या, डकैती और अन्य अपराधों के तहत आरोप तय किए गए हैं। साल 2009 से लेकर अब तक ये पांचों जेल में बंद हैं और इनपर केस चल रहा है। जिगिशा मामले में तो सजा भी सुनाई जा चुकी है, लेकिन सौम्या केस में अब 18 अक्टूबर को फैसला आएगा। परिवार वालों को पूरा भरोसा है कि उन्हें इंसाफ मिलेगा और उनकी बेटी के कातिलों को सजा।

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