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‘बिहार की राजनीति के कैंसर लालू, भाजपा करेगी इलाज’

‘लालू प्रसाद सही मायने में बिहार की राजनीति में कैंसर हैं। वे भ्रष्टाचार के प्रतीक हैं और कुछ भी नहीं।’ कभी लालू यादव से राजनीति का ककहरा सीखने वाले और फिलहाल बिहार बीजेपी के अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने कुछ यूं पलटवार किया है। दरअसल, आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद ने जातीय गणना की आलोचना करने वालों पर बयान दिया था। जिस पर बीजेपी और सहयोगी पार्टियों ने लालू यादव को पुराने दिनों की याद दिला दी।

लालू पर सम्राट का तीखा पलटवार

सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार की राजनीति में कोई एक व्यक्ति अगर राजनीति का कैंसर बन गया है तो उसका नाम है लालू प्रसाद और उसका बचाव नीतीश कुमार कर रहे हैं। एक समय था, जब नीतीश कुमार ने चारा घोटाले में उन्हें जेल भिजवाया और आज भी लैंड फॉर जॉब मामले में वे कोर्ट का चक्कर लगा रहे हैं। भाजपा ने दोनों का इलाज शुरू कर दिया है।

उन्होंने दावा किया कि बिहार में आगामी सरकार भाजपा की बनेगी, दोनों सत्ता से बाहर हो जाएंगे और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनी रहेगी। लालू प्रसाद जंगल राज और गुंडाराज के प्रतीक हैं और उन्हें सजा दिलाकर नीतीश कुमार ने ये साबित कर दिया। प्रदेश में अव्यवस्था फैलाने वाले तंत्र का नाम लालू प्रसाद है।

सम्राट चौधरी ने कहा कि ये कोई आज की बात नहीं है, जातीय उन्माद उनका शौक है, जिसे वो 1990 से अंजाम देते आ रहे हैं। वे 2015 के चुनाव में उन्होंने बैकवर्ड , फॉरवर्ड का नारा देकर समाज को बांट दिया। अब बिहार की जनता सब समझ गई है।

कुशवाहा ने भी लालू को घेरा

सोशल साइट एक्स पर आरएलजेडी अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने लिखा कि ‘श्रीमान लालू जी, हां महोदय, यह सच है कि कैंसर के इलाज के लिए कैंसर की दवा ही चाहिए। लेकिन इसका यह भी अर्थ नहीं है कि इलाज के नाम पर छाली घुम फिर कर आप और आपका परिवार खाए और बाकी लोगों को मठ्ठा भी नसीब न हो। कैंसर के इलाज के लिए प्रदेश की जनता ने आपको भी डॉक्टर की कुर्सी पर बैठाया था। तब आपकी फीस नौकरी के बदले जमीन थी न। कम से कम आप न्यायिक चरित्र की बात मत कीजिए, शोभा नहीं देता है। अगला डॉक्टर भी आपके परिवार से बाहर आपको दिखता ही नहीं है। आपके परिवार से बाहर भी बहुत बड़ी दुनिया है ,सर। पिछड़े/अति पिछड़े/दलितों की।’

लालू ने दिया था कैंसर वाला बयान

दरअसल, सोमवार को लालू प्रसाद ने सोशल साइट एक्स पर लिखा था कि जातिगत जनगणना के विरुद्ध जो भी लोग है वो इंसानियत, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक बराबरी तथा समानुपातिक प्रतिनिधित्व के ख़िलाफ हैं। ऐसे लोगों में रत्तीभर भी न्यायिक चरित्र नहीं होता है। उन्होंने आगे लिखा कि किसी भी प्रकार की असमानता और गैरबराबरी के ऐसे समर्थक अन्यायी प्रवृत्ति के होते हैं जो जन्म से लेकर मृत्यु तक केवल और केवल जन्मजात जातीय श्रेष्ठता के आधार एवं दंभ पर दूसरों का हक खाकर अपनी कथित श्रेष्ठता को बरकरार रखना चाहते है। कैंसर का इलाज सिरदर्द की दवा खाने से नहीं होगा।

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