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बीजेपी, कांग्रेस या क्षेत्रीय पार्टियां, किस दल में हैं सबसे दागी सांसद, रिपोर्ट देख लीजिए

देश के लगभग 40 प्रतिशत मौजूदा सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 25 प्रतिशत ने हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ अपराध के तहत गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। चुनाव अधिकार निकाय एडीआर ने यह जानकारी दी है। एडीआर ने कहा कि लोकसभा और राज्यसभा के प्रत्येक सांसद की संपत्ति का औसत मूल्य 38.33 करोड़ रुपये है और 53 (7 प्रतिशत) अरबपति हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) और नेशनल इलेक्शन वॉच (एनईडब्ल्यू) ने लोकसभा और राज्यसभा की 776 सीटों में से 763 मौजूदा सांसदों के स्व-शपथ पत्रों का विश्लेषण किया है।

किस दल के कितने सांसदों पर आपराधिक केस

एडीआर के मुताबिक, भाजपा के 385 सांसदों में से लगभग 98 (25 प्रतिशत), कांग्रेस के 81 सांसदों में से 26 (32 प्रतिशत), तृणमूल कांग्रेस के 36 सांसदों में से सात (19 प्रतिशत),राजद के 6 सांसदों में से 3 (50 प्रतिशत), माकपा के 8 सांसदों में से 2 (25 प्रतिशत), आप के 11 सांसदों में से 1 (9 प्रतिशत) वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 31 में से 11 (35 प्रतिशत) और राकांपा के 8 में से 2 (25 प्रतिशत) सांसदों ने अपने हलफनामे में गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। ग्यारह मौजूदा सांसदों ने हत्या (भारतीय दंड संहिता धारा-302) से संबंधित मामलों , 32 मौजूदा सांसदों ने हत्या के प्रयास (आईपीसी धारा-307) के मामलों जबकि 21 मौजूदा सांसदों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से संबंधित मामलों की घोषणा की है। इन 21 सांसदों में से चार सांसदों ने दुष्कर्म (आईपीसी धारा-376) से संबंधित मामलों की घोषणा की है।

सबसे अधिक संपत्ति किस राज्य के सांसद की

प्रति सांसद उच्चतम औसत संपत्ति वाला राज्य तेलंगाना (24 सांसद) है। यहां केस सांसदों की औसत संपत्ति 262.26 करोड़ रुपये है। इसके बाद आंध्र प्रदेश (36 सांसद) है, जिनकी औसत संपत्ति 150.76 करोड़ रुपये है। उसके बाद पंजाब (20 सासंद) आता है जहां सांसदों की औसत संपत्ति 88.94 करोड़ रुपये है। सांसदों की सबसे कम औसत संपत्ति वाला राज्य लक्षद्वीप (1 सांसद) है, जहां सांसद की औसत संपत्ति 9.38 लाख रुपये है, इसके बाद त्रिपुरा (3 सांसद) की औसत संपत्ति 1.09 करोड़ रुपये और मणिपुर (3 सांसद) की औसत संपत्ति 1.12 करोड़ रुपये है।

चुनावी हलफनामों से तैयार हुई रिपोर्ट

यह आंकड़ा सांसदों द्वारा अपने पिछले चुनाव और उसके बाद का कोई भी उप-चुनाव लड़ने से पहले दायर किए गए हलफनामों से निकाला गया है। लोकसभा की चार सीटें और राज्यसभा की एक सीट खाली है और जम्मू-कश्मीर की चार राज्यसभा सीटें अपरिभाषित हैं। एक लोकसभा सांसद और तीन राज्यसभा सांसदों के हलफनामों का विश्लेषण नहीं किया जा सका क्योंकि ये दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं थे। उसके मुताबिक, विश्लेषण किए गए 763 मौजूदा सांसदों में से 306 (40 प्रतिशत) मौजूदा सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की जानकारी दी है और 194 (25 प्रतिशत) मौजूदा सांसदों ने उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले होने की जानकारी दी है जिनमें हत्या, हत्या के प्रयास, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध आदि से संबंधित मामले शामिल हैं।

मामलों की जानकारी देने में केरल अव्वल

एडीआर ने कहा कि दोनों सदनों के सदस्यों में, केरल के 29 सांसदों में से 23 (79 प्रतिशत), बिहार के 56 सांसदों में से 41 (73 प्रतिशत), महाराष्ट्र के 65 सांसदों में से 37 (57 प्रतिशत), तेलंगाना के 24 सांसदों में से 13 (54 प्रतिशत) दिल्ली के 10 सांसदों में से पांच (50 प्रतिशत) ने अपने शपथपत्रों में उनके खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। उसने कहा कि बिहार के 56 सांसदों में से लगभग 28 (50 प्रतिशत), तेलंगाना के 24 सांसदों में से नौ (38 प्रतिशत), केरल के 29 सांसदों में से 10 (34 प्रतिशत), महाराष्ट्र के 65 सांसदों में से 22 (34 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश से 108 सांसदों में से 37 (34 प्रतिशत) ने अपने स्व-शपथपत्रों में गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी दी है। विश्लेषण में कहा गया कि भाजपा के 385 सासंदों में से 139 (36 प्रतिशत), कांग्रेस के 81 सांसदों में से 43 (53 प्रतिशत), तृणमूल कांग्रेस के 36 सांसदों में से 14(39 प्रतिशत), राजद के छह सांसदों में से पांच (83 प्रतिशत), माकपा के आठ सासंदों में से छह (75 प्रतिशत), आम आदमी पार्टी के 11 सांसदों में से तीन (27 प्रतिशत), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के 31 सांसदों में से 13 (42 प्रतिशत) और राकांपा के आठ सांसदों में से तीन (38 प्रतिशत) सांसदों ने हलफनामों में उनके खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है।

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