रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट ने वैवाहिक विवाद से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने पति के आचरण को गंभीर रूप से अनुचित बताया है। न्यायालय ने कहा कि पत्नी की निजी और आपत्तिजनक तस्वीरें रखना गलत है। बिना अनुमति ऐसी तस्वीरें अपने पास रखना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। अदालत ने इसे मानसिक क्रूरता का स्पष्ट उदाहरण माना है। फैसले में महिला की गरिमा पर विशेष जोर दिया गया है। न्यायालय ने कहा कि विवाह में भरोसा सबसे अहम होता है। इस तरह की हरकतें रिश्ते को तोड़ने वाली होती हैं। अदालत ने महिला के अधिकारों को सर्वोपरि बताया है। इस फैसले को महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि निजी तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी देना बेहद गंभीर अपराध है। यह कृत्य महिला के चरित्र हनन का प्रयास है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसी धमकियां मानसिक उत्पीड़न के समान हैं। इससे महिला की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है। न्यायालय ने पति के व्यवहार को अस्वीकार्य बताया है। कोर्ट ने कहा कि डिजिटल माध्यमों का दुरुपयोग बढ़ता जा रहा है। ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है। अदालत ने यह भी कहा कि विवाह में सम्मान और सुरक्षा अनिवार्य है। महिला को डराकर दबाव बनाना कानून के खिलाफ है। यह फैसला समाज के लिए संदेश है।
अदालत के इस निर्णय से वैवाहिक कानून की दिशा स्पष्ट हुई है। न्यायालय ने महिला के आत्मसम्मान को संवैधानिक अधिकार बताया है। फैसले से भविष्य के मामलों में मार्गदर्शन मिलेगा। कानूनी विशेषज्ञों ने फैसले का स्वागत किया है। इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। कोर्ट ने साफ किया कि निजी जीवन की गोपनीयता जरूरी है। किसी भी तरह की धमकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह फैसला समाज में जागरूकता बढ़ाएगा। महिलाओं को कानूनी सुरक्षा का भरोसा मिलेगा। झारखंड हाईकोर्ट का यह निर्णय मिसाल बनेगा।

