इस फेरी को ‘फ्लाइंग फेरी’ कहा जा रहा है और इसे पानी के ऊपर उठाने के लिए एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
क्यों है ये खबर महत्वपूर्ण?
यह प्रयोग इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह भविष्य के परिवहन के लिए एक नई संभावना को दर्शाता है। इस तरह की फेरी पारंपरिक फेरी की तुलना में बहुत तेज़ गति से चल सकती है और इससे यात्रा का समय कम हो सकता है। साथ ही, यह इलेक्ट्रिक होने के कारण पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद है।
कैसे काम करती है ये फेरी?
इस फेरी को पानी के ऊपर उठाने के लिए एक विशेष तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इस तकनीक में फेरी के नीचे से हवा निकाली जाती है, जिससे फेरी पानी के ऊपर उठ जाती है। इस तरह से फेरी पानी के संपर्क में नहीं आती है और इसलिए घर्षण कम होता है, जिससे फेरी तेजी से चल सकती है।
फायदे क्या हैं?
- तेज़ गति: यह फेरी पारंपरिक फेरी की तुलना में बहुत तेज़ गति से चल सकती है। इसकी अधिकतम गति 55 किलोमीटर प्रति घंटा है।
- पर्यावरण के लिए फायदेमंद: यह फेरी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है, इसलिए इससे कोई प्रदूषण नहीं होता है।
- यात्रा का समय कम: तेज़ गति होने के कारण इस फेरी से यात्रा का समय कम हो जाता है।
चुनौतियां क्या हैं?
- लागत: इस तरह की फेरी को बनाने और चलाने में काफी खर्च होता है।
- तकनीक: इस तकनीक को अभी और विकसित करने की जरूरत है।
- सुरक्षा: इस तरह की फेरी की सुरक्षा को लेकर भी कुछ सवाल उठते हैं।
भविष्य में क्या होगा?
अगर यह प्रयोग सफल रहा तो भविष्य में इस तरह की फेरी को व्यावसायिक रूप से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे जल परिवहन में क्रांति आ सकती है।
मुख्य बिंदु:
- स्टॉकहोम में एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग फेरी का परीक्षण किया जा रहा है।
- यह फेरी पारंपरिक फेरी की तुलना में बहुत तेज़ है।
- यह फेरी पूरी तरह से इलेक्ट्रिक है और पर्यावरण के लिए फायदेमंद है।
- इस तरह की फेरी भविष्य के परिवहन के लिए एक नई संभावना है।

