देशभर में गर्मी ने कहर बरपाया हुआ है।
जम्मू-कश्मीर वन आग की घटनाओं के मामले में सबसे आगे निकल गया है.
जिससे वन विभाग और पर्यावरणविदों की चिंताएं बढ़ गई हैं। आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि 4 जून से अब तक जम्मू-कश्मीर में कुल 172 वन आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं।
यह स्थिति इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे अत्यधिक तापमान, शुष्क मौसम और वनों में सूखी पत्तियां आग लगने के प्रति अधिक संवेदनशील वातावरण बना रही हैं। इन आगजनी से न केवल वनस्पति और वन्यजीवों को भारी नुकसान हो रहा है, बल्कि आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। धुएं के कारण दृश्यता में कमी आई है और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ गया है। कई स्थानों पर आग तेजी से फैल रही है।
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन आग पर काबू पाने और उन्हें फैलने से रोकने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। दुर्गम भौगोलिक बाधाएं और आग का विशाल फैलाव बचाव कार्यों को मुश्किल बना रहा है। इस तरह की व्यापक वन आग का पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है, जिसमें जैव विविधता का नुकसान, मृदा अपरदन और जलवायु परिवर्तन में योगदान शामिल है।


