बेबी नयना का वन्यजीव फोटोग्राफी का सफर.
चेन्नई, तमिलनाडु: बेबी नयना की कहानी शिकार की विरासत को संरक्षण के संकल्प में बदलने की एक अद्भुत मिसाल है।
नयना का परिवार एक समय शिकारी था, लेकिन उन्होंने उस क्रूर अतीत को छोड़कर वन्यजीव फोटोग्राफी के लेंस को अपना लिया। यह परिवर्तन दर्शाता है कि कैसे कला और जुनून, विनाश को संरक्षण में बदल सकते हैं।
नयना का कहना है कि उनके पूर्वज जंगल में शिकार करते थे, लेकिन समय के साथ उन्हें यह एहसास हुआ कि जानवरों को मारना नहीं, बल्कि बचाना ज़रूरी है। फोटोग्राफी ने उन्हें जंगल और उसके निवासियों को एक नए और गहरे सम्मान के साथ देखने का मौका दिया। उन्होंने अपने कैमरे के माध्यम से यह दिखाना शुरू किया कि हर वन्यजीव कितना अमूल्य है।
फोटोग्राफी के माध्यम से, नयना अब वन्यजीवों के संरक्षण का संदेश दुनिया भर में फैला रही हैं। उनका काम लोगों को यह याद दिलाता है कि जंगल सिर्फ शिकार की जगह नहीं, बल्कि जीवन का एक खजाना है, जिसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।



