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मायावती हो गईं एक्सपोज, की थी NOTA को वोट करने की अपील, क्या BSP सुप्रीमो के हाथ से छूट रही वोटरों की बागडोर?

उत्तर प्रदेश के घोसी विधानसभा उपचुनाव के परिणाम ने बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बसपा सुप्रीमो ने चुनाव के पहले अपने वोटरों को एक बड़ा संदेश दिया था। उन्होंने कहा था कि 5 सितंबर को होने वाली वोटिंग में उनके समर्थक या तो वोट देने नहीं जाए। अगर वे वोट देने जा रहे हैं तो नोटा को वोट दें। शुक्रवार को जारी चुनाव परिणाम ने मायावती को एक्सपोज कर दिया है। नोटा को पड़े वोटों को अगर देखा जाए तो मायावती की अपील का असर कुछ खास होता नहीं दिख रहा है। घोसी की जनता ने दो तरफ वोट डाले। एक तरफ दारा सिंह चौहान के समर्थन में वोटिंग हुई तो दूसरी तरफ सुधाकर सिंह के पक्ष में वोट डाले गए। बसपा सुप्रीमो का चुनाव में भाग न लेने की अपील का कोई बड़ा असर घोसी के चुनावी मैदान में होता नहीं दिखा है। घोसी विधानसभा उप चुनाव के रिजल्ट ने मायावती की राजनीति पर अब सवालिया निशान खड़ा करना शुरू कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अब भी मायावती के समर्थक वोटर उनके साथ उसी प्रकार जुड़े हैं, जैसे वे हमेशा से रहे हैं?

बसपा ने खुद को रखा है अलग

यूपी की राजनीति में बसपा खुद को अलग राजनीतिक धारा के रूप में पेश करती दिख रही है। मतलब, वह न तो एनडीए की तरफ है और न ही I.N.D.I.A. की तरफ। दोनों ही गठबंधनों पर मायावती लगातार हमलावर हैं। वहीं, I.N.D.I.A. के बैनर तले पहली बार समाजवादी पार्टी विधानसभा उपचुनाव के मैदान में उतरी। कांग्रेस और राष्ट्रीय लोक दल का मोरल सपोर्ट समाजवादी पार्टी के साथ था। यूपी चुनाव 2022 के बाद यह पहला विधानसभा उपचुनाव था, जिसमें समाजवादी पार्टी पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी और जीत दर्ज करने में कामयाब हो गई। यूपी चुनाव 2022 के बाद से हुए उप चुनावों में अमूमन भाजपा और सपा के बीच ही सीधा मुकाबला होता रहा है। आजमगढ़ लोकसभा उप चुनाव के त्रिकोणीय मुकाबले को छोड़ दें तो बसपा और कांग्रेस ने उप चुनाव से दूरी बनाई दिखती है।

घोसी विधानसभा उप चुनाव में भी कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी ने अपने उम्मीदवार नहीं उतरे थे। बसपा सुप्रीमो मायावती ने तो चुनाव के ठीक पहले घोषणा कर दी कि उनके समर्थक वोट डालने ही न जाएं। अगर कोई वोट डालने जा रहा है तो वह नोटा को वोट दे। लेकिन, मायावती की इस अपील का असर घोसी में नहीं दिख रहा है।

वोटिंग में कम दिखा उत्साह

उप चुनावों में वोट प्रतिशत अमूमन कम हो जाता है। घोसी विधानसभा उपचुनाव में भी इसका असर दिखा। यूपी चुनाव 2022 के दौरान घोसी विधानसभा सीट पर 58.53 फीसदी मतदान हुआ था, लेकिन 5 सितंबर को जब उपचुनाव की वोटिंग हुई तो 50.30 फीसदी मतदाता ही घरों से बाहर निकाल कर वोट डालने मतदान केंद्रों तक पहुंचे। अगर इसे मायावती अपनी अपील का असर माने तो वह अलग बात है। हालांकि, इस तरह से वोटिंग में अंतर अन्य विधानसभा या फिर लोकसभा उपचुनाव में देखने को लगातार मिला है। इसका कारण उपचुनाव को लेकर वोटरों में उत्साह की कमी होना भी माना जाता है। 8 फीसदी से अधिक वोटरों के मतदान केंद्रों पर न पहुंचने का नुकसान भाजपा को इस बार झेलना पड़ा है।

नोटा के वोट तो खोल रहे पोल

नोटा को लेकर जिस प्रकार से मायावती अपील करती दिखीं, उसका कोई खास असर नहीं हुआ। यह रिजल्ट ने साफ कर दिया है। यूपी चुनाव 2022 के दौरान 10 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इसमें नोटा को 1249 वोट मिले थे। 0.49 फीसदी वोट शेयर के साथ नोटा छठे स्थान पर रहा। वहीं, घोसी उप चुनाव 2023 में नोटा को 1725 वोट मिले। नोटा 0.79 फीसदी वोट शेयर के साथ पांचवें स्थान पर रहा। अगर नोटा को पड़े वोटों में पिछले चुनाव से वृद्धि की तुलना करें तो 476 वोट अधिक मिले हैं। मतलब, नोटा के पाले में कोई बड़ा वोट शेयर ट्रांसफर होता नहीं दिखा है।

यूपी चुनाव 2022 के दौरान सपा को 42.21 फीसदी, भाजपा को 33.57 फीसदी और तीसरे स्थान पर रही बसपा को 21.12 फीसदी वोट मिले थे। अगर इस लिहाज से नोटा को मिलने वाले वोटों का आंकड़ा लगाए तो इस बार भी मायावती की अपील के बाद इसी के आसपास नोटा को वोट आने चाहिए थे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। सपा को 57.19 फीसदी और भाजपा को 37.54 फीसदी वोट मिलते दिखे हैं। इस प्रकार मुकाबला दोतरफा बनकर रह गया।

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